ऑपरेटिंग सिस्टम. Operating System Kya Hai

ऑपरेटिंग सिस्टम Operating System

Opetating System ऑपरेटिंग सिस्टम

ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System ) कुछ छोटे-छोटे प्रोग्राम का एक समूह है जो कि कम्प्यूटर हार्डवेयर तथा कम्प्यूटर प्रयोक्ता के मध्य एक पुल (Bridge) का कार्य करता है। इसे सिस्टम सॉफ्टवेयर (System software), कट्रोल सिस्टम (Control System) अथवा एक्सीक्यूटिव सिस्टम (Executive system) भी कहा जाता है।

कम्प्यूटर निर्माताओं के द्वारा बनाया गया यह सॉफ्टवेयर बाजार में तैयार मिलता है जिन्हें प्रयोक्ता खरीद कर इस्तेमाल करता है। सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में यह एक अति आवश्यक तथा महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर है जिसका कम्प्यूटर पर कार्यकरते समय उसकी स्मृति में होना अति आवश्यक है।

ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) बाजार में फ्लोपी डिस्क पर संचित मिलता है अतः जब भी कम्प्यूटर पर कार्य करना होता है, सबसे पहले इसे फ्लोपी से कम्प्यूटर की मुख्य स्मृति स्थानान्तरित करना पड़ता है तथा इस प्रक्रिया को बूटिंग (Booting) कहते है।

ऑपरेटिंग सिस्टम की अवधारणा (Concept of operating System)

ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) एक कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर है जिसे कम्प्यूटर की विभिन्न इकाईयों में सामंजस्य स्थापित करने तथा उन्हें नियंत्रित (Control) करने के लिये बनाया गया है। यह कम्प्यूटर और प्रयोगकर्ता के बीच की कड़ी है।

वास्तव में यह प्रोग्राम किसी कम्पनी के मैनेजर की भांति पूर्ण कम्प्यूटर सिस्टम को सुचारू रूप से तथा दक्षता से चलाने का दायित्व निभाता है तथा कम्प्यूटर प्रयोगकर्ता के लिए सिस्टम प्रयोग को सुगम एवं आसान बनाता है।

ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) मुख्यतः निम्न कार्यों को संपादित करता है।

(a) प्रोसेसर मैनेजमेंट : कम्प्यूटर सिस्टम में चल रहे विभिन्न कार्यों को प्रोसेसर को देना।

(b) मेमोरी मैनेजमेंट : प्राइमरी मेमोरी में सिस्टम प्रोग्राम प्रयोगकर्ता प्रोग्राम तथा डेटा आदि को विभिन्न स्थानों पर लोड करना।

(c) इनपुट/ आउटपुट मैनेजमेंट : यह एक या एक से अधिक निष्पादित हो रहे प्रोग्रामों के मध्य इनपुट तथा आउटपुट युक्तियों का प्रबन्ध करता है तथा प्रोग्रामों को उन्हें आवंटित भी करता है।

(d) फाइल मैनेजमेंट : यह विभिन्न स्टोरेज युक्तियों पर फाइलों के स्टोरेज का व्यवस्थापन करता है। फाइल को एक युक्ति (Device) से दूसरी पर लाने-ले जाने की सुविधा भी प्रदान करता है।

(e) प्रायिकता : यदि कम्प्यूटर में एक से अधिक कार्य संपादित हो रहे हो तो उनकी प्रायिकता (Priorities) भी निर्धारित करता है।

(F) कमाण्ड इन्टरपिटर : निर्देश (Instructions) तथा कमाण्डो को समझना

(g) मध्यरत कड़ी : कम्प्यूटर सिस्टम तथा प्रयोगकर्ता के गाय (Commands की कड़ी) के को रूप समझना में कार्य करता है

इसके अतिरिक्त भी ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) कई कार्यो को करता है। ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) का कुछ भाग प्राइमरी मेमोरी में हमेशा रहता है इस भाग को रेजिडेंट प्रोग्राम कहते है तथा इसका कुछ भाग सेकेंडरी मेमोरी में रहता है

जिसे ट्राजिएन्ट कहते है इनकी जब आवश्यक्ता होती है तब ही इन्हें मुख्य मेमोरी में लोड किया जाता है अर्थात प्रत्येक कंप्यूटर में हार्डवेयर के साथ ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) भी होता है जिससे प्रयोगकर्ता सिस्टम को अच्छी तरह से उपयोग करता है

वर्तमान में कई  ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) प्रयोग में लिये जाते है जिनमें से मुख्य है-  यूनिक्स, सिस्टम लाइनक्स  माइक्रोसोफ्ट डॉस, विन्डोज आदि

एम एस-डॉस MS-Dos

MS-DOS व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला सबसे अधिक प्रचलित ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) है। इसका पूरा नाम माइक्रोसोफ्ट डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम (Micro Soft Disk operating System) है। इसे विकसित करने वाली संस्था का नाम माइक्रोसोफ्ट कार्पोरेशन (Micro Soft Corp.) है जो कि अमेरिका में स्थित है।

MS-DQS एक सिंगल यूजर (Single User) ऑपेरटिंग सिस्ट म है अर्थात् यदि किसी कम्प्यूटर में MS-DOS ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) है तो उस कम्प्यूटर को एक समय में एक ही व्यक्ति इस्तेमाल कर सकता है। यह सभी प्रकार के माइक्रो कम्प्यूटरों (Micro Computer)

जैसे PC (Personal Computer), PC-XT (Personal

Computer Extended Technology) तथा PCIAT (Personal Computer Advance Technology) के लिए सर्वाधिक उपयोग में आने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) है।

डॉस का संगठन (Organization of Dos)

डॉस पांच विभागों में बंटा हुआ है जिनके नाम क्रमशः बूट रिकार्ड (Boot Record), बायोस फाईल (BIOS File), कोर डॉस (Core Dos), कमाण्ड प्रोसेसर (Command Processor) तथा यूटिलिटी प्रोग्राम (Utility Program)। इन सभी विभागों के कार्य निम्नलिखित है

बूट रिकार्ड – यह डॉस की डिस्क के प्रथम सैक्टर में स्थित होता है। जब हम कम्प्यूटर ऑन (On) करतहै, तब सर्वप्रथम इसे ही कम्प्यूटर द्वारा पढ़ा जाता है। इस प्रोग्राम में ये सभी निर्देश लिखे होते हैं,

जिनकी सहायता से बायोस फाईल तथा कोर डॉस को पढ़कर कम्प्यूटर की मेमोरी में स्थानान्तरित किया जाता है।

बायोस फाईल – इसे 00.SYS) फाईल भी कहते है। इस प्रोग्राम में सभी निर्देश संचित होते है जिनकी सहायता से कम्प्युटर हार्डवेयर तथा सहायक उपकरणों (Porpheraldovices) को नियन्त्रित करने के काम आता है

इस हार्डवेयर उपकरणों को डाटा देने तथा सूचना प्राप्त करने का काम भी इसी प्रोगामी से सम्पन्न कराया जाता है।

कोर डॉस – इसे MSDOS फाईल भी कहते है। यह सबसे मुख्य फाईल है। इस प्रोग्राम में भी वे सभी निर्देश होते है, जिसकी सहायता से प्रबन्धन सम्बन्धी सभी कार्य जैसे मेमोरी प्रबन्धन प्रोसेसर आदि कराये जाते है

कमाण्ड प्रोसेसर – इस फाइल का नाम COMMAND.COM है। यह प्रयोक्ता द्वारा दिये गये कमांडो के प्रोसेस करके आवश्यक कार्य  सम्पन्न कराती है। इसी फाईल की सहायता से हम विभिन्न प्रोग्रामों को लोड  करके क्रियान्वित कराते है।

यूटिलिटी प्रोग्राम – डॉस में कुछ मुख्य फाईलों के अलावा कई अन्य प्रोग्राम फाइले भी होती है जो किसी एक विशेष कार्य को सम्पन्न कराने के काम आती है।

उदाहरणार्थ- फाईले कॉपी करना दिया कॉपी करना डिस्क फॉरमेट करना आदि के प्रोग्राम।

विभिन्न डॉस वर्जन (Different Dos Versions)

वर्जन या जिनसे सामान्य बोलचाल की भाषा में संस्करण भी कहते है किसी भी सोफ्टवेयर के विकास के समय को दर्शाता है। सर्वप्रथम माइक्रोसोफ्ट कारपोरेशन ने जो डॉस बनाया था वह Ms-Dos 1.0 था. उसके समय पश्चात् उसमें कुछ परिवर्तन करके नया संस्करण Ms-Dos-20 उपलब्ध कराया गया।

फिर उसके Ms-Dos 3.0, Ms-Dos-3.30, Ms-Dos 4.01. Ms-Dos 5.0, Ms-Dos-6.0 तथा उसकी नवीनतम संस्करण Ms-Dos 6.22 है। सामान्यतः जब पुराने संस्करण में बहुत अधिक परिवर्तन लाया जाता है तो दशमलय।

पूर्व की संख्या को बढ़ाया जाता है तथा यदि पुराने संस्करण में सिर्फ थोड़ा ही परिवर्तन किया जाता है। दशमलव के बाद की संख्या को बढ़ाया जाता है।

फाइल तथा उनके नाम (File and File Name)

तार्किक रूप से (Logically), क्रमवार व्यवस्थित (Sequentially arranged) रिकार्डों या सूचनाओं के समूह को फाईल (File) कहते हैं फाईल का कम्प्यूटर के क्षेत्र में बड़ा महत्व है। कम्प्यूटर तथा इसके प्रयोक्ता (user) के मध्य सूचना का आदान-प्रदान फाइलों के माध्यम से ही होता है।

जिस तरह साधारण रूप में काम आने वाली फाइलें अपने नाम से जानी जाती है जैसे-इन्कम टैक्स फाइल (Income Tax file) बिल (Bil), सेल्स (Sales) फाइल आदि ठीक उसी प्रकार कम्प्यूटर फाइलों का भी एक नाम होता है तथा वे उसी नाम से संचित की जाती है तथा आवश्यकतानुसार पुनः प्राप्त की जाती है।

कम्प्यूटर फाइलों के नाम निम्न प्रकार दिए जाते हैं।

” फाइल नाम दो हिस्सों में बँटा हुआ होता है जो एक दूसरे से एक दशमलव के द्वारा विभाजित होते हैं। फाइल नाम के पहले हिस्से को प्राइमरी फाइल नाम (Primary file name) कहते हैं तथा दशमलव के बाद के हिस्से को एक्सटेंशन (Extension) कहा जाता है।

प्राइमरी फाइल नाम अधिक से अधिक 8 अक्षरों (Characters) का हो सकता है तथा कम से कम 1 अक्षर तो होना ही चाहिये। एक्सटेंशन (Extension) अधिक से अधिक 3 अक्षरों का हो सकता है तथा जरूरत न हो तो इसे देना अनिवार्य नहीं है।

XXXXXXXX XXX

Primary Name Extension

max 8 character 3 character

min 1 character O character

वैसे तो प्राइमरी फाइल नाम तथा एक्सटेंशन के रूप में कुछ भी लिखा जा सकता है लेकिन व्यावहारिक नियम ये कहते है कि फाइल का प्राइमरी नाम उसमे संचित सुचनाओं को दर्शाना तथा उसका एक्सटेंशन उस सॉफ्टवेर को दर्शाना चाहिये जिसमे उस फाइल को बनाया गया है

इसका प्राइमरी नाम mark ये दर्शाता है कि ये किसी शिक्षण संस्थान में स्टूडेंट के अंको से सम्बंधित फाइल है और तथा इसका एक्सटेंशन ये दर्शाता है कि ये उच्छ स्तरिये भाषा पास्कल में बनाई गई है

एक्सटेंशन फाइल निम्न है

  1. .DAT         –                         –    डाटा (Data) फाइल
  2. .BAS, .COB, .CPR. .PAS        –    स्त्रोत (Source) प्रोग्राम फाइल
  3. .BAN बैकअप                        –     (Backup) फाइल
  4. .COM, .EXE                         –      एक्सिक्यूटेबल (Executable) फाइल
  5. .DBF डाटाबेस                       –      (Data Base) फाइल
  6. .SYS सिस्टम                        –       (System) फाइल
  7. BAT                                    –        (Batch File)

एम एस-डॉस की मुख्य फाइलें (Main Files of MS-DOS)

जैसा कि हम अब तक जान ही पुके है कि MS-DOS बहुत सी फाइलों का एक समूह है जो कि कम्प्यूटर तथा उसके सहायक उपकरण (Peripheral device) के संचालन में योगदान देती है। MS-DOs की कुछ मुख्य फाइल निम्न प्रकार से है

I0.SYS – इसे इनपुट-आउटपुट सिस्टम (Input-output System) फाईल भी कहते है। इसमें यह प्रोग्राम सचित होता है जो कि कम्यूटर के सहायक उपकरणों (Peripheral devices) को डाटा भेजने या उनसे डाटा प्राप्त करने से सम्बन्धित होता है।

अर्थात कम्प्यूटर में डाटा तथा सूचनाओं के संचार सम्बन्धी सभी कार्य io SYS फाइल के द्वारा ही किये जाते है।

MS-DOS.SYS – इस फाइल में यह प्रोग्राम तथा तार्किक निर्देश सचित रहते है जो डाटा संगठन (Organization) तथा प्रबंधन (Management) का कार्य करते है।

COMMAND.COM – जब हम अपने कम्प्यूटर में सचित फाइलों की सूची देखेंगे तो पायेंगे कि सिर्फ यह फाइल ही दिखती है। क्योकि अन्य दोनों फाइलें जिन्हें हम पूर्व में अध्ययन कर चुकेहै ये छिपी (Hidden) हुई होती है या पूरी में उनका नाम नहीं आता है।

COMMAND.COM फाइल कम्यूटर के प्रयोक्ता द्वारा दिये गये निर्देश को पढ़ कर कम्यूटर के द्वारा निर्देशानुसार कार्य सम्पन्न कराता है। MS-DOS के बहुत से कमाण्ड (Command) भी इस फाइल के साथ कम्प्यूटर की मुख्य स्मृति में सचित रहते हैं।

CONFIG.SYS – यह एक ASCII Text फाइल है जिसमें कम्प्यूटर के सिस्टम संरूप (System Configuration) सम्बन्धित कमाण्ड होते हैं। जब किसी Pc को किया जाता है तो यह सबसे पहले अपनी मेमोरी की जांच करता है

उसके बाद Dos की तीन मुख्य फाइलों (जिनका विवरण पहले दिया गया है) को अपनी मेमोरी में स्थानान्तरित करता है तथा इसके बाद इस फाइल में दिये निर्देशानुसार कार्य करके कम्प्यूटर को हमारे कार्य करने हेतु तैयार करता है।

इस फाइल की सहायता से हम अपने कम्प्यूटर की मुख्य स्मृति का निपुणता से उपयोग कर सकते है

Dos कमाण्ड

DOS में दो प्रकार के कमांड होते है आतंरिक(internal) तथा बाह्य (External) कमांड आतंरिक कमांड वे होते है जो Booting के दौरान कंप्यूटर की स्मृति में स्थानांतररित हो जाते है तथा इन्हें देने के लिये हमें किसी अन्य फाइल की आवश्यकता नहीं होती है बाहय Dos कमांड वे होते है

जो Booting के दोरान कम्प्यूटर की मुख्य स्मृति में स्थानान्तरित होने के बजाय डिस्क पर ही रहते हैं तथा प्रत्येक बाह्य कमाण्ड को लिए DOS में एक विशेष फाइल होती है। बाह्य कमाण्ड देने के लिए उन विशेष फाइलों का होना आवश्यक है।

विण्डोज तथा GUI

GUI की संक्षिप्त जानकारी और विन्डोज की अवधारणा

वर्तमान युग में कम्प्यूटर में ग्राफिकल यूजर इंटरफेस (GU) एक सामान्य तथा महत्वपूर्ण गुण है। इस पर सर्वप्रथम माइक्रोसोफ्ट कॉर्पोरेशन ने कार्य किया परन्तु सर्वप्रणाम बाजार में एप्पल कापरिशन ने इसे पेश किया।

1984 में एप्पल मेकिनटोष बाजार में आया जिसका प्रमुख गुण या ग्राफिकल यूजर इंटरफेस। इसके इसके कई रूप बाजार में आये जैसे विण्डोज एम एस डॉस के लिए तथा एक्स-विण्डोज यूनिक्स के लिए।

GUI सिस्टम के प्रमुख गुण

  • स्क्रीन पर कई ओवरलेप विण्डोज आना।
  • इनपुट युक्ति माउस जिसके द्वारा प्रयोगकर्ता स्क्रीन के विभिन्न भागों को इंगित (Point) कर सके।
  • कई गाफिकल आकृति जैसे बटन आइकन स्लाइड बार आदि।
  • उच्च स्तरीय ग्राफिकल तत्व जैसे मेन्यू, डॉयलॉग बॉक्स लिस्ट, बटन आदि।

(GUI) आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) आने से पूर्व प्रयोगकर्ता कम्प्यूटर को आदेश प्रोग्प्ट पर लिख कर देता था से एम एस डॉस में (Dir) कमाण्ड या यूनिक्स में (Ls) आदि/ GUI आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) में प्रयोगकर्ता कम्प्यूटर कमाण्डों को याद करने की आवश्यकता नहीं है।

कम्प्यूटर को दिये जाने वाले आदेशों को विभिन्न मूहों में विभाजित कर उन्हें विभिन्न विण्डोज में एकत्रित किया जाता है जिनमें से माउस या कीबोर्ड द्वारा UI तत्वों को चुन कर कमाण्ड दिया जाता है।
GUI के प्रमुख तत्व है

  • विण्डो मेन्यू
  • (सिस्टम मेन्यू ड्रॉप डाउन मेन्य)
  • डायलॉग बॉक्स
  • आइकन
  • बटन
  • लिस्ट बॉक्स
  • स्क्रोल बार
  • डेस्कटॉप आदि

डेस्कटॉप से तात्पर्य स्क्रीन से है, जिस पर एक से अधिक विण्डोज खुल सकती है। प्रत्येक विण्डो में बसे ऊपर एक बार होती है जो कि विडो के नाम को दर्शाती है। उसे टाइटल बार कहते है। एक में कई आइकन हो सकते है। प्रत्येक आइकन विभिन्न अनुप्रयोगों अर्थात एप्लीकेशनों को दर्शाता है।

डेस्कटॉप पर एक या अधिक विंडो खोल सकते है प्रत्येक विंडो के आकार को छोटा अथवा बढ़ा भी कर सकते है टाइटल बार के नीचे कई विंडो में मेनू बार होती है जब किसी मेनू पर क्लिक करते है तो उस मेनू के विकल्प एक सूची के रूप में खुल जाते है

आप उसमें से एक विकल्प माउस की सहायता से चुन सकते है डायलोग बॉक्स की सहायता से कमांड को दी जाने वाली अतिरिक्त जानकारी जैसे फाइल का नाम प्रकार आदि दे सकते है विंडो के दायी और ऊपर कोने में दो बटन होते है जिनके द्वारा विंडो का आकार न्युनतम अथवा अधिकतम कर सकते है।

विडो का आकार बदलने के अतिरिक्त विंडो का स्थान परिवर्तन भी किया जा सकता है।

यूनिक्स/ लिनक्स (UNIX I LINUX)

यूनिक्स एक प्रभावशाली ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) है। इसमें एक साथ कई कार्य करने की सुविधा है। अत: इसेमल्टीयूजर मल्टीटास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम कहते है।

यह सर्वाधिक प्रयोग में आने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) है। यूनिक्स का इतिहास 1969 से आरम्भ होता है। जब अमेरिका की प्रतिष्ठित बैल प्रयोगशाला में मेनफ्रेम कम्प्यूटरों के लिए मल्टीक्स नाम का ऑपरेटिंग सिस्टम बनाया गया।

उस समय तक कम्प्यूटरों के साथ सूचना का आदान प्रदान कार्ड के द्वारा बैच प्रक्रिया में होता था।

इस प्रक्रिया में काफी समय खराब होता था। इस कमी को गल्टिक्रा द्वारा दूर किया गया। यह पहला ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) था जिसमें निर्देश कमाण्ड के टाइप
करते ही तुरन्तु उसके अनुरूप कार्य आरम्भ हो जाता था।

1969 में केन थॉमसन ने मल्टिक्स को आधार मानकर एक नए 05 का निर्माण किया और उसे नाम दिया यूनिक्स। यूनिक्स हर प्रकार के कम्प्यूटर पर गली
सके इसलिए थॉमसन ने इसका पुनः निर्माण C भाषा में किया। इस (OS) का 95 प्रतिशत भाग C भाषा लिखा गया है।

इसका केवल 5 प्रतिशत भाग जो कि इसका हद्वय भाग है, असेम्बली भाषा में लिखा गया। यही कारण है इस ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) का आज भी तेजी से विकास हो रहा है।

यूनिक्स/ लिनक्स की विशेषताएं (Characterstics of UNIX/ LINUX)

बहुप्रयोगकर्ता क्षमता (Muitiuser): यूनिक्स एक बहुप्रयोगकर्ता ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) है। बहुप्रयोगकर्ता प्रजा सिस्टमों में एक समय में बहुत सारे व्यक्ति काम कर सकते है और एक ही समय पर अलग-अलग विभिना कामों को लिया जा सकता है।

इससे कम्प्यूटर के विभिन्न संसाधनों (Resources) का एक साथ प्रयोग किया सकता है। इसमें कई सारे टर्मिनलों (कीबोर्ड, मॉनीटर) से एक समय में बहुत से व्यक्ति अलग-अला) प्रकार के कई प्रोग्राम चला सकते है।

ऑपरेटिंग सिस्टम(Operating System) विभिन्न कार्यों का संयोजन इस प्रकार करता है। रे काम एक समय में संपादित होते हुए भी महसूस होते है।

बहुकामकाजी (Multitasking): यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) द्वारा एक समय में एक से अधिक कार्य सम्मान ये जा सकते है। उदाहरण के लिए हम प्रिंटर पर प्रिंट निर्देश देने के साथ-साथ ईमेल भी पढ़ सका।यूनिस Os एक साथ कई काम करने की सुविधा प्रदान करता है अतः कम्प्यूटर के प्रोसेसिंग का उत्तम माना किया जा सकता है।

स्थानांतरण सुविधा/ स्थानांतरण (Portability): यूनिक्स का 95 प्रतिशत भाग C में लिखा गया है। 5 प्रतिशत ही असेम्बली भाषा में है। अतः केवल थोडे से परिवर्तन मात्र से इसको अन्य कंप्यूटरप पर स्थानांतरित किया जा सकता है। इसी कारण यूनिक्स सभी प्लेटफार्म पर उपलब्ध है।

सुरक्षा : युनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) में सुरक्षा की और विशेष ध्यान दिया कम्प्यूटर गया है। विभिन्न स्तरों पर सुरक्षा उपाय किये गये है सबसे पहले login स्तर पर ही प्रयोग कर्ता कंप्यूटर का प्रयोग सही पासवर्ड डालकर ही कर पाता है।

टाइप करते समय पासवर्ड अदृश्य रहता है। इसके अलावा फाइल स्तर पर भी सुरक्षा उपलब्ध है। इस ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) में प्रत्येक प्रयोगकर्ता अपनी फाइल हेतु पढने-लिखने चलाने (Read-write-Execute) की मान्यता निर्धारित कर सकता है।

अतः कोई भी दूसरे की किसी फाइलका उपयोग तभी कर सकता है, जबकि उसे इसको फाइल प्रयोग करने की इजाजत हो। यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) वायरस से भी सुरक्षित है।

Computer

डॉस तथा यूनिक्स/ लिनक्स की तुलना (Difference between Dos and UNIXT LINUX)

डॉस (DOS) यूनिक्स (UNIX)
1 एकल प्रयोगकर्ता ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) 1 बहुप्रयोगकर्ता ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System)
2. एकल कामकाजी 2 बहुकामकाजी
3 केवल माइक्रो कम्प्यूटरों हेतु 3 सभी प्रकार के कम्प्यूटरों हेतु
4 विशिष्ट प्लेटफार्म IBM पर्सनल कम्प्यूटर हेतु 4. सभी प्लेटफार्मो हेतु
स्थानांतरणता नहीं स्थानांतरणता पाई जाती है।
5.स्थानांतरणता नहीं 5.स्थानांतरणता पाई जाती है।
6. सुरक्षा व्यवस्था अत्यन्त कम 6.पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था
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