धनराज भगत की जीवनी (Dhanraj Bhagat)

धनराज भगत (Dhanraj Bhagat)का जन्म

1917 ई 0 मैं लाहौर में हुआ था

धनराज भगत (Dhanraj Bhagat)  की शिक्षा

इन्होंने मेयो कॉलेज ऑफ आर्ट्स लाहौर से मूर्ति कला में डिप्लोमा प्राप्त किया यह दिल्ली महाविद्यालय में विभागाध्यक्ष भी रहे और यहीं से सेवानिवृत्त हुए इन्होंने मेसी पेपर धातु, कास्ट, प्रस्तर वह सीमेंट धातुआदि माध्यमों से अपनी मूर्ति सिलपो की रचना की

पुरस्कार

इनकी कला साधना को 1977 ई 0 पदम श्री से सम्मानित किया गया सन 2010 ईस्वी में राजकीय कला महाविद्यालय चंडीगढ़ मैं धनराज भगत स्कल्पचर पार्क की स्थापना हुई

धनराज भगत (Dhanraj Bhagat) के प्रमुख मूर्ति शिल्प

द किंग बांसुरी वादक, सितार वादक, कॉस्मिक मैन ,शीर्षक हीन,  ( मोनार्क ) श्रंखला आदि प्रमुख मूर्ति शिल्प है

कॉस्मिक मैन – यह मूर्ति शिल्प सीमेंट व प्लास्टर से बनाया गया है वर्तमान में यह मूर्ति शिल्प ललित कला अकादमी नई दिल्ली में संग्रहीत हैं इस मूर्ति शिल्प में ज्यामितीय आकार से मानव दिखाया है जिस के ऊपरी भाग में अर्ध चंद्रमा स्थित है जो यह दर्शाता है कि यह कॉस्मिक मैन अंतरिक्ष मानव है

शीर्षक हीन (मोनार्क) इसकी रचना में लकड़ी ताम्रपत्र व किलो का उपयोग किया गया है मोनार्क की श्रंखला में (शासक राजा) को जनप्रतिनिधि के रूप में प्रदर्शित किया गया है मूर्ति शिल्प को अलंकृत करने में धातु पत्रों व कीलों का प्रयोग किया गया है लकड़ी में खुदाई कर कुदरा पन लिए हुए हैं यह मूर्ति शिल्प धनराज भगत के निजी संग्रह में सुरक्षित है बनाए गए आकृतियां

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