Praja Mandal movement

प्रजामण्डल आन्दोलन (Praja Mandal movement) को प्रजा परिषद और लोक परिषद भी कहा जाता है

प्रजामण्डल आन्दोलन (Praja Mandal movement )  अखिल भारतीय देसी राज्यों के लोक नृत्य में चलाए गए थे इसकी स्थापना 1927 में मुंबई मैं भी की गई थी
अखिल भारतीय देसी राज्य लोक परिषद का राजस्थान में एकमात्र अधिवेशन 31 दिसंबर 1945 और 1 जनवरी 1946 को जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में उदयपुर में हुआ था

अखिल भारतीय देसी राज्य लोक परिषद के राजस्थान प्रांत की एक इकाई की स्थापना 1931 में अजमेर में रामनारायण चौधरी ने की  देसी रियासतों में राजाओं के विरुद्ध स्थानीय जानू नेताओं द्वारा चलाए गए आन्दोलनों को ही प्रजा मंडल आन्दोलन कहां जाता है

कांग्रेस का 1938 का अधिवेशन सुभाष चंद्र बोस की अध्यक्षता में हरिपुरा (गुजरात) मैं हुआ था जिसमें पहली बार देसी रियासतों में लॉक तांत्रिक और उत्तरदाई सरकार स्थापित करने का प्रस्ताव पारित किया गया था
इसी प्रकार कांग्रेस ने 1938 से प्रजामण्डल आन्दोलन (Praja Mandal movement ) को सहयोग दिया

झालावाड़ का शासक हरिश्चंद्र राजपूताना का एकमात्र शासक था जिसने प्रजामण्डल आन्दोलन (Praja Mandal movement ) को सहयोग और संरक्षण दिया

राजस्थान में स्थापित पहला प्रजामण्डल आन्दोलन (Praja Mandal movement ) जयपुर था जबकि अंतिम प्रजामण्डल आन्दोलन (Praja Mandal movement ) झालावाड़ था

राजस्थान में सर्वप्रथम राजनीतिक कार्य करने वाला प्रजामण्डल आन्दोलन (Praja Mandal movement ) जोधपुर था

जैसलमेर ऐसा ऐसा प्रजामण्डल आन्दोलन (Praja Mandal movement ) था जिसकी स्थापना जोधपुर में की गई

जैसलमेर और जयपुर ऐसे प्रजामण्डल आन्दोलन (Praja Mandal movement ) थे जिन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग नहीं लिया था

बीकानेर प्रजामण्डल आन्दोलन (Praja Mandal movement ) की स्थापना 1935 में कोलकाता में की गई थी जिसे 1936 में पुनः बीकानेर स्थापित किया गया

सिरोही प्रजामण्डल आन्दोलन (Praja Mandal movement ) की स्थापना 1934 में मुंबई की गई थी जिसे 1939 मैं पुनः सिरोही में स्थापित किया गया

भरतपुर प्रजामण्डल आन्दोलन (Praja Mandal movement ) आन्दोलन (Praja Mandal movement ) की स्थापना 1939 में प्रजा परिषद के नाम से खाड़ी में की गई थी

जयपुर प्रजामण्डल आन्दोलन (Praja Mandal movement ) की स्थापना 1931 में कपूरचंद बाटनी ने की थी परंतु इसका 1937 में और अर्जुन लाल सेठी ने पुनर्गठन किया जमनालाल बजाज, हीरालाल शास्त्री अर्जुन लाल सेठी ने पुनर्गठन किया था

जयपुर प्रजामण्डल आन्दोलन (Praja Mandal movement ) का पहला अधिवेशन जमनालाल बजाज की अध्यक्षता में 1938 में जयपुर में किया गया जिसमें कस्तूरबा गांधी ने
भी भाग लिया था

18 मार्च 1939 को दुर्गावती शर्मा के नेतृत्व में महिलाओं ने जयपुर में धरना प्रदर्शन किया था

1942 में जयपुर प्रजामण्डल आन्दोलन के अध्यक्ष हीरालाल शास्त्री और जयपुर के प्रधानमंत्री मिर्जा इस्माईल के मध्य एक समझौता हुआ था जिसे जैन प्ले मेन एग्रीमेंट कहां जाता है

1942 मैं जयपुर प्रजामण्डल आन्दोलन का विभाजन हो गया इसका विभाजित भाग आजाद मौर्य कहलाया जिसकी स्थापना भामा हरिश्चंद्र , रामकरण जोशी और दौलत मल भंडारी ने की थी

आजाद मौर्य 1945 में पुनः जयपुर प्रजामण्डल आन्दोलन में शामिल हो गया

जोधपुर प्रजामण्डल आन्दोलन पर रोक लगाने के लिए 1934 में मारवाड़ पब्लिक सोसाइटी ऑर्डिनेंस पारित किया गया था

मारवाड़ प्रजामण्डल आन्दोलन द्वारा 1936 में शिक्षा दिवस और कृष्णा दिवस मनाया गया था

मारवाड़ प्रजामण्डल आन्दोलन के दौरान 19 जून 1942 को बाल मुकंद बिस्सा की भूरत हड़ताल के कारण मृत्यु हो गई

बीकानेर महाराजा गंगा सिंह ने बीकानेर प्रजामण्डल आन्दोलन (Praja Mandal movement ) का सेशवा काल में ही दमन कर दिया था इस घटा को बीकानेर प्रजामण्डल आन्दोलन की भ्रूण हत्या कहा जाता है

बीकानेर प्रजामण्डल आन्दोलन के दौरान 30 जून 1946 को रायसिंहनगर में बीरबल सिंह नामक युवक शहीद हुआ बीरबल सिंह की स्मृति में

17 जुलाई 1946 को बीकानेर प्रजा मंडल द्वारा बीरबल दिवस मनाया गया
मेवाड़ प्रजामण्डल आन्दोलन की स्थापना 24 अप्रैल 1938 को माणिक्य लाल वर्मा द्वारा बलवंत सिंह मेहता की अध्यक्षता में की गई

मेवाड़ प्रजामण्डल आन्दोलन  का पहला अधिवेशन माणिक्य लाल वर्मा की अध्यक्षता में 1941 में उदयपुर में हुआ था जिस के मुख्य अतिथि अचार्य

जे. पी कृपलानी थे इस अधिवेशन में विजय लक्ष्मी पंडित ने भी भाग लिया था
राजस्थान में सर्वप्रथम लोकतांत्रिक और उत्तरदाई सरकार की स्थापना 14 अगस्त 1947 को शाहपुरा रियासत में की गई थी

शाहपुरा के शासक सुदर्शन देव ने शव इच्छा से राजा का पद छोड़कर गोकुल लाल आसावा के नेतृत्व में पाली लोकतांत्रिक सरकार गठित की
धौलपुर प्रजामण्डल  के दौरान तसिमो हत्याकांड हुआ था

इसमें 11 अप्रैल 1947 को ठाकुर पंचम सिंह और ठाकुर छत्र सिंह शहीद हुए थे
डूंगरपुर राज्य द्वारा शिक्षा पर रोक लगा दी गई थी इसके बावजूद भी वहा सेंगा बाई नामक शिक्षक आदिवासी बच्चों को पढ़ाते थे

इस कारण सेंगा बाई की पुलिस द्वारा पिटाई की गई सेंगा बाई को बचाते हुए 19 जून 1947 को कालीबाई भील और नाना बाई खाट पुलिस की गोली का शिकार हो गए

कोटा प्रजामण्डल आन्दोलन  की स्थापना 1939 में प. नयनुराम शर्मा द्वारा की गई थी इस आन्दोलन का पहला अधिवेशन 1939 में ही प. नयनुराम शर्मा की अध्यक्षता में मांगरोल ( बारा) में हुआ था प. नयनुराम शर्मा कोटा राज्य की पुलिस सेवा में थे

प.नयनुराम शर्मा 14 अक्टूबर 1941 को उनके गांव नमाणा अज्ञात व्यक्तियों द्वारा हत्या कर दी गई थी

राजस्थान के किसान आंदोलन

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