माइकल एंजिलो (MichelAngelo)

माइकल एंजिलो MichelAngelo

माइकल एंजिलो (MichelAngelo)- पुनरुत्थान का दूसरा महान कलाकार माइकलएंजिलो था फ्लोरेंस राज्य के केप रीज नामक स्थान पर उसका जन्म हुआ था उसके पिता एक रेजिडेंट न्यायधीश थे उसका जन्म होने के कुछ ही समय बाद परिवार को फ्लोरेंस स्थानांतरित होना पड़ा

1488 में पारिवारिक विरोध का सामना करते 3 वर्ष तक वह वहां रहा जहां उसने फ्रेस्को तकनीकी के अतिरिक्त डिजाइन की सफाई तथा छाया प्रकाश के प्रभाव सीखे थे आगे चलकर अपने जीवन में उसने इस तथ्य को छिपाने की चेष्टा भी की, क्योंकि वह नहीं चाहता था

की उसके शिक्षकों  में किसी साधारण कलाकार का नाम भी लिया जाए कुछ ही समय पश्चात वह लोरेंजो द मेडिसी के संरक्षण में बर तोल दो के पास कार्य सीखने पहुंच गया फिर भी संभवत: उसने भित्ति – चित्रण टेक्निक घिर्लेंधियो से सीखा था और वही उसने प्राचीन आचार्य की रेखा न्यू कुर्तियां बनाए थी

इनमें से जिआेत्तो थता मासच्चियो की अनु कृतियां  लुब्र म्यूनिख एवं वियना में 1492 मे उसका संरक्षक लोरेंजो चल बसा माइकेलएंजेलो बोलाना चला गया और 1496 में रोम पहुंच गया वहां उसने अपनी प्रथम महत्वपूर्ण  कृतियां बेकस एवं सेंट पिटर के चर्च में पीएटा की प्रतिमा गडी इस प्रतिमा की रचना से उसका यश आ रा रा रा रा बहुत फेल गया

1501 में  वह  प्रसिद्ध मूर्ति शिल्पी के रूप में फ्लोरेंस लोटा और वहां 1505 इसवी तक रहा इस अवधि में वह बहुत व्यस्त रहा 1503-4 मैं उसने पवित्र परिवार का चित्रण किया इसमें बड़े आकार उच्च भाऊ भूमि विरत्व तथा शक्ति मयता का समन्वय हुआ हैं

इसमें कुमारी की आकृति में मातृत्व की स्पंदन शीलता, चेतना तथा परिपेक्ष्य की गहराई को भरती हुई आकृतियों की चेस्ट आएं मानो उस समय की शास्त्रीय कला के शांत संयोजन को चुनौती दे रही है  प्रकाशीय प्रभाव के बजाय रंगो की मौलिक तथा प्रवाही योजना की गई है

जिसमें रंगों के हल्के- गहरे बलों का कोई विचार नहीं किया गया है कलाकार की दृष्टि ठोस मूर्ति  ये है जो पृष्ठभूमि की अनावृत आकृतियों में भी प्रतिध्वनि है

माइकल एंजिलो (MichelAngelo) ने ग्रीक पतिन्न के पेडिमेंट मैं उत्कीर्ण आकृतियों तथा किन्नरों के रिफिल के आधार पर एक चित्र बनाया था जो खो गया है स्नान आरती इसमें कलाकार के द्वारा नग्न आकृतियों के रूप में मानव को  गौरवान्वित करने का प्रयत्न किया गया ही फ्लोरेंस के संसद भवन हेतु उसने वह भित्ति -चित्र भी 1504 इसवी मैं बनाना आरंभ किया

जिस का कार्यभार उसे लियोनार्द के साथ-साथ सौंपा गया था यह कार्य पूर्ण ना हो सका और दो महान स्थानीय कला कारो द्वारा महान कलाकृति की रचना का सपना अधूरा रह गया इससे संबंधित पीसा के युद्ध का दृश्य अंकित करने के हेतु उसने जो रेखा चित्र बनाए थे

इनमें नग्न मानव शरीर को पूर्ण आकारों में चित्रित करके उसी के द्वारा उन अनेक भाव को  प्रकट किया गया है जिनका चित्रण किसी कलाकार द्वारा संभव है यह चित्र वर्षों तक फ्लोरेंस के प्रत्येक नवयुवक चित्रकार हेतु दर्शनीय एवं अनुकरणीय बने रहे और इटली की परवर्ती कला पर इनका व्यापक प्रभाव पड़ा इनकी रेखा अनुकृति रिफिल ने भी की थी

इन्हीं की शैली में आगे चलकर उसने सिस्टाइन चैपल की छत में सृष्टि संबंधी चित्रों का अंकन में आरंभ किया यह कार्य उसे बीच मैं ही छोड़ना पड़ा 1506 से 1508 तक पॉप जूलियस द्वितीय के मकबरे का निर्माण कार्य करने के बाद 1508 में वह रोम लोटा और सिस्टाइन चैपल की छत का चित्रण पुनः आरंभ किया

अपने साथियों एवं शिष्यों के कार्य से असंतुष्ट होकर उसने समस्त चित्रों को स्वयं ही चित्रित किया बुरा मानते ब्रमानते की ब्रमानते माइकल एंजिलो (MichelAngelo)  से अनबन रहती थी रहती थी माइकल एंजेलो जब मेडिसी का मैं मकबरा बना रहा था तब  ब्रमानते ने मेडिसी को बहका दिया था की

अपने ही जीवन काल में अपना मकबरा बनाना अशुभ होता है इससे मेडिसी ने मकबरे का निर्माण तुरंत रुकवा दिया था और उसे निकाल भी दिया था इसी प्रकार जब माइकल एंजिलो (MichelAngelo)  चैपल की छत चित्रित करने को बुलाया गया था तब भी ब्रमानते अपने चित्रकार दल

को वहां उसकी सहायता करने के बहाने ले आया था तथा मचान भी बनवा दिया था माइकल एंजिलो (MichelAngelo)  को शक हो गया अतः उसने चित्रकार दल को भी लौटा दिया और ओसम मचान को खुलवा कर नया मचान बनवायाब्रमानते को विश्वास था कि माइकल एंजेलो यह कार्य नहीं कर सकेगा और

उसे खूब लज्जित होना पड़ेगा परंतु स्पर्धा तथा पोप के दबाव के कारण माइकल एंजिलो (MichelAngelo) , इस कार्य में लग गया मार्च 10, 1508 को उसने लिखा था, मैंने मूर्तिकार माइकल एंजेलो ने आज इस चैपल को चित्रित करना आरंभ किया अगले वर्ष 27 जनवरी 1509 को उसने पुनः लिखा की यह चित्रांकन मेरा व्यवसाय नहीं है

मैं व्यर्थ ही अपना समय नष्ट कर रहा हूं माइकल एंजिलो (MichelAngelo) ने भित्ति – चित्रण तकनीकी की बारीकियां सीखी और कपिल चैपल को अंदर से बंद करके चित्र बनाता रहा लंबे खींचते समय तथा गोपनीयता से पोप भी उसने मचान खोलने की आज्ञा दे दी उसके प्रतिद्वंदी तथा प्रशंसक सभी चित्रों को देखकर हतप्रभ यार आश्चर्यचकित रह गए लोग रिफिल को भी श्रेष्ठ चित्रकार समझते थे

किंतु माइकल एंजिलो (MichelAngelo) के यह चित्र सर्वश्रेष्ठ तथा महान कलाकृति मान लिए गए और 37 वर्ष की आयु मैं ही उसे महानतम जीवित चित्रकार मान लिया गया था से सांसारिक मनुष्य से बढ़कर समझा जाने लगा

यह चित्र तीन समूह में और प्रत्येक समूह के तीन खंड है पहले समूह में संसार की सृष्टि के तीन दृश्य है

(1) ईश्वर द्वारा प्रकाश को अंधकार से पृथक करना

( 2) चांद तारों की सृष्टि तथा

(3) पृथ्वी को आशीर्वाद दूसरे संघ के दृश्य है

(4) आदम की सृष्टि

(5) हवा की सृष्टि तथा

(6) स्वर्ग से पतन अंतिम समूह मैं हूं

(7 ) नूह  का बलिदान

(8) प्रलय तथा

(9)नूह का नशा इसके पश्चात धर्म दूध और भविष्य दृष्टा चित्रित हैं

साथ ही ईशा के जन्म की भविष्यवाणी अंकित है चारों कोनों में मुक्ति संबंधी दृश्य हैं नीचे के अंधेरे भाग में ईशा के पूर्वजों का चित्रण है दृश्यों को धार्मिक आकृतियों तथा अलंकारिक अभिप्राय द्वारा इस प्रकार संबंधित कर दिया गया है मूर्तियों तथा से भरे हुए क्षेत्र के बीच – बीच में 9 बड़े चित्र जड़ दिए गए हैं

सृष्टि रचना के मिथक की रहस्य पूर्ण कहानियां भवन की ज्यामितीय संरचना मैं उबर कार आती है मूर्ति जैसे शक्ति, रंगों की सघनता, विचार पूर्ण तथा अंत – करण के संकल्प के अनुरूप प्रयुक्त मुद्राएं और आकृतियों का अकेलापन सास्वत के लिए अकुल तनाव को युक्त करता है

यद्यपि इस मैं माइकल एंजेलो ने मौलिकता दिखाइए परंतु सब कुछ चैपल के वास्तु की योजना के अधीन रखा गया है 1512 में इस कार्य को पूर्ण करके वह फ्लोरेंस में मेडिसी के पास चला गया

वह बहुत दुर्बल हो गया था और आंखों से भी कम दिखाई देने लगा था उसका नवीन आश्रय दाता पॉप लियो दशम था जो लोरेंजो का छोटा पुत्र था उसने उसे अपने पारिवारिक चर्च के प्रवेश द्वार को पूर्ण करने का कार्य सौंपा किंतु 4 वर्ष तक सर खपाने के पश्चात बी वह उसे ना बना सका

1524 में इस पुनः कार्य आरंभ हुआ इसी समय उसे लोरेंजी या नो पुस्तकालय के भवन की योजना बनाने का कार्य सौंपा गया इसके तू उसने जूलियाना कथा लोरेंजो की प्रतिमाएं दिन -रात और प्रातः संध्या की प्रतीक आकृतियां निर्मित की यह मूर्तियां उसकी शैली के श्रेष्ठ उदाहरण है

1527 मैं मेडिसी को फ्लोरेंस से निकाल दिया गया माइकल एंजिलो (MichelAngelo)  ने राज्य का पक्ष लिया 1529 में उसे एक बार आतंक के कारण भागना पड़ा 1530 में मेडिसी ने धार्मिक क्षेत्र में पुनः अपना आदि पत्ते स्थापित कर लिया माइकल एंजिलो (MichelAngelo) को क्षमा कर दिया गया और उसने पुनः 1534 तक वहां कार्य किया

इसके पश्चात रोम में जाकर स्थाई रूप से रहने लगा और जीवन के अंतिम 30 वर्ष वही व्यतीत किए वहां सिस्टाइन चैपल की वेदी की पर अंतिम न्याय का चित्रण करने हेतु से पुनःआमंत्रित किया गया

1536 में उसने इसमें कार्य आरंभ किया इस बीच रूम पर आक्रमण हुआ इससे माइकल एंजिलो (MichelAngelo) के मन में एक प्रकार की निराशा व्याप्त हो गई जो इस कृति में स्पष्ट है इस समस्त चित्रों से लोगों में यह धारणा बलवती हुई की नग्न मानव करती स्कोर स्थित है

लघुता की दृष्टि से विभिन्न मुद्राओं में प्रस्तुत करना ही चित्रकला का लक्ष्य है और यह बहुत कठिन है पाल तृतीय ने इससे प्रभावित होकर चित्रों के हेतु उसे आमंत्रित किया यह यह है संत बाल की बातचीत और संत फिटर की सूली माइकल एंजिलो (MichelAngelo)  अब 75 वर्ष का था

भवन निर्माण में अभी रुचि लेने लगा था संत पीटर के प्रसिद्ध चर्च का वह प्रधान वास्तुशिल्पी का जीवन के अंतिम दिनों में उसने ईशा की सूली के अनेक ए का चित्र बनाएं सुंदर कविताएं लिखी इसी पर कार्य करते हुए   12 फरवरी 1564 में उसकी मृत्यु हो गई मैं

माइकल एंजिलो (MichelAngelo)  इटली के चरम पुनरुत्थान के चित्रकारों मैं एक खटोर साधक , पूर्ण पारंगत कलाकार महान व्यक्तित्व कवि के रूप में भी वह इटली में आदित्य था उसके समय ही कला का केंद्र फ्लोरेंस से हटकर रोम हुआ जब वह नहीं रहा तो यह केंद्र वेनिस मैं पहुंच गया माइकल एंजेलो अपने चित्रों में मूर्तिकार स्वभाव के कारण  मानवकृतियां क प्रमुख रूप में दिखाता था

किंतु उसकी मानव कृतियों मैं भी पुरुषत्व आ गया है विद्वानों का विचार है कि उसमें शास्त्रीय तथ गोथिक दोनों शैलियों का समन्वय है एक और तो वह मार्शल और ठोस शरीर का चित्रण करना चाहता था जो उसका वंशानुगत प्रभाव था दूसरी और वह गोथिक प्रभाव के कारण आत्मा की बेचैनी और सृष्टि के रहस्य को करना चाहता था अंत में वह बरोग कला की शक्ति मता स आकाश आकर्षित हुआ

मायकेल ने प्रकृति के भव्य चित्रण को तिलांजलि दे दी थी उसकी कला में ऐसे व्यापक प्रयोग हैं जो उसे जियो तो से लेकर बीसवीं सदी तक के कलाकारों से संबंधित करते थे पुनरुत्थान के पश्चात जो रीती वाद प्रचलित हुआ उस पर माइकल एंजिलो (MichelAngelo) का व्यापक प्रभाव पड़ा उसे बरोक कला का पिता भी को दिया जाता है

लियोनार्डो दा विंची (Leonardo da Vinci)

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