भारतीय स्वतंत्रता के प्रमुख क्रान्तिकारी bharat ke pramukh krantikari

bharat ke pramukh krantikari

10 क्रांतिकारियों के नाम

भगत सिंह (krantikari  Bhagat Singh 1907 – 1931 ई.)

भारत का महान एवं अमर क्रांतिकारी (krantikari) सपूत जिसके बलिदान ने देश की आगामी पीढ़ियों के लिए अमित मिसाल पेश की है भगत सिंह का जन्म 1907ई.में पंजाब के लायलपुर जिले में एक सिख परिवार में हुआ था |

उन्हें पारिवारिक माहौल ही राष्ट्रीयता का मिला व्वे 1925ई. में हिंदुस्तान रिपब्लिकन सोसाइटी से जुड़े काकोरी कांड में वे भी शामिल थे किंतु भाग निकले उन्होंने पंजाब में युवकों के क्रांतिकारी (krantikari) संगठन

‘ नवजीवन भारत सभा’ की स्थापना की एवं स्वयं इसके महासचिव बने 1928 ई. में उन्होंने पुलिस अधिकारी सांडर्स  की गोली मारकर हत्या कर दी जिसने साइमन कमीशन विरोधी प्रदर्शन के दौरान लाला लाजपत राय पर लाठीचार्ज किया था जिससे लाला जी की मृत्यु हो गई |

8 अप्रैल, 1929 ई. को उन्होंने बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर लाहौर व्यवस्थापिका मैं बम फेंक कर ब्रिटिश शासन को हिला दिया भगत सिंह पर लाहौर षड्यंत्र केस के तहत मुकदमा चलाया गया तथा 23 मार्च, 1931 ई. को उन्हें फांसी की सजा दे दी गई भगत सिंह ने व्हाई आई एम एन एथिस्ट , नामक ग्रंथ लिखा जिससे समाजवाद के प्रति उनके झुकाव का पता चलाया है |

रासबिहारी बोस (krantikari  Rash Behari Bose 1886 – 1945 ई.)

बीसवीं सदी के क्रांतिकारियों में रासबिहारी बोस का अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान है इनका जन्म 1886 ई. मैं हुआ था तथा यह आरंभ से ही क्रांतिकारी (krantikari) गतिविधियों से जुड़ गए इन्होंने पंजाब, दिल्ली तथा संयुक्त प्रांत में अपने गुप्त संपर्क स्थापित किया  1912 ई.

मैं दिल्ली में वायसराय  हार्ड्रिग पर बम फेंकने की घटना में वे मुख्य अभियुक्त थे किंतु किसी प्रकार बच निकले थे यह बनारस में छिप गए प्रथम विश्व युद्ध के दौरान1915 ई. में जर्मनी की सहायता से बनाई गई विद्रोह की  योजना में भी शामिल थे |

किंतु इस संबंध में अंग्रेजों को पूर्व जानकारी मिल जाने से योजना विफल रही इन्होंने 1942 ई . में टोक्यो मैं दक्षिण पूर्व में रहने वाले भारतीयों का सम्मेलन बुलाया था |

उन्होंने बैंकॉक में इंडियन इंडिपेंडेंट लिंग की स्थापना की थी इन्होंने विश्व युद्ध के दौरान जापान द्वारा बंदी बनाए गए भारतीय सैनिकों को मिलाकर आजाद हिंद फौज का गठन किया तथा उसका नेतृत्व बाद में सुभाष चंद्र बोस को सौंप  दीया 1945 ई. में जापान में ही उनकी मृत्यु हो गई |

सुभाष चंद्र बोस (krantikari Subhas Chandra Bose  1897 – 1945)

वे महान भारतीय स्वाधीनता सेनानी थे सुभाष का जन्म 23 जनवरी 1897 ई. स्कोर कोलकाता में हुआ था वे आरंभ से ही बड़े मेधावी विद्यार्थी थे वे 1920 ई. में आई. सी. एस. में चयनित हो गए थे |

किंतु उन्होंने 1 वर्ष बाद ही अपने पद से त्यागपत्र दे दिया तथा असहयोग आंदोलन में कूद पड़े किंतु गांधी के द्वारा अचानक असहयोग आंदोलन के स्थान से उन्हें भारी निराधा हुई तथा वे

सी. आर. दास की स्वराज पार्टी से जुड़ गए उनका बंगाल के कुछ क्रांतिकारी (krantikari) गुटों से भी संपर्क रहा वे कोलकाता के मेयर भी बने सरकार ने उन्हें आशंका के आधार पर1925 ई. से1927 ई. तक बर्मा में नजरबंद रखा उन पर वामपंथी विचारधारा का भी काफी प्रभाव था |

वे इंडिपेंडेंस लोग से जुड़ गए तथा भारत की पूर्ण स्वाधीनता की मांग की उन्होंने गांधी के द्वारा सविनय अवज्ञा आंदोलन का नेतृत्व किए जाने का विरोध किया1 वे1938 ई. मैं कांग्रेस के हरिपुरा अधिवेशन के अध्यक्ष चुने गए1939 ई. मैं त्रिपुरी अधिवेशन में गांधी उनका विरोध करते हुए क्षुद्रता पर उतर आए थे |

किंतु सुभाष उनके विरोध के बावजूद पुनः अध्यक्ष चुने गए उन्होंने मई1939 ई. में फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सरकार ने उन्हें उनके निवास पर नजर बंद कर दिया किंतु दिसंबर1940 ई. मे वे भारत से निकल गए तथा विदेशी शक्तियों के सहयोग से भारत को स्वतंत्र करवाने का निश्चय किया

1941 ई. मे वे बर्लिन पहुंचे तथा वहां इंडियन लीजन की स्थापना की उन्होंने रेडियो बर्लिन से भी अनेक भाषण दिए जून1943 ई. मे वे जापान गए तथा वहां से सिंगापुर पहुंच गए वे वहां भारतीय स्वतंत्रता संघ के अध्यक्ष बने तथा आजाद हिंद फौज के सेनापति भी रहे |

उनके नेतृत्व में आजाद हिंद फौज के पूर्वोत्तर भारत में युद्ध लड़े किंतु उन्हें परास्त होना पड़ा कहा जाता है कि 8 अगस्त1945ई. को सुभाष जब विमान से टोक्यो जा रहे थे तो विमान दुर्घटना मैं उनका निधन हो गया |

सुखदेव (krantikari Sukhdev  1907 – 1931)

आधुनिक भारत के अमर क्रांतिकारियों में सुखदेव का महत्वपूर्ण स्थान है उनका जन्म पंजाब के लायलपुर में हुआ था वे शीघ्र ही क्रांतिकारी (krantikari) गतिविधियों से जुड़ गए तथा उत्तरी भारत में गुप्त क्रांतिकारी गतिविधियां संचालित करते रहे यह भगत सिंह तथा चंद्रशेखर आजाद के निकट सहयोगी थे |

इन्होंने 1928 ई. मैं हिंदुस्तानी सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना में आजाद का साथ दिया तथा पंजाब व संयुक्त प्रांत में इस संगठन की गतिविधियों को संचालित किया लाहौर षड्यंत्र केस के तहत इन पर मुकदमा चलाकर इन्हें फांसी की सजा सुनाई  गई |

अंत: 23 मार्च 1931 ई. को सुखदेव को भगत सिंह तथा राजगुरु  के साथ फांसी के तख्ते पर लटका दिया गया तथा वे राष्ट्र के नाम शहीद हो गए

बाल गंगाधर तिलक (krantikari Bal Gangadhar Tilak 1857 – 1920ई.)

तिलक महान स्वतंत्रता सेनानी थे वे लोकमान्य के नाम से विख्यात थे उन्होंने राष्ट्रवादी भावनाओं को बहुत अधिक प्रोत्साहन दिया वे राष्ट्रीय आंदोलन के प्रथम नेता थे जिसने जनसाधारण के साथ निकट संबंध स्थापित किए इस अर्थ में उन्हें गांधी का अग्रगामी माना जा सकता है |

उन्होंने ने अपना जीवन एक शिक्षक के रूप में प्रारंभिक किया कथा न्यू इंग्लिश स्कूल की स्थापना की अखाड़ा लाठी क्लब तथा गणपति व शिवाजी महोत्सव के द्वारा उन्होंने महाराष्ट्र में नवीन जागृति का संचार किया

उन्होंने मराठा (अंग्रेजी) तथा  केसरी (मराठी) नामक दो समाचार पत्र निकाले वे आरंभ से ही कांग्रेस से जुड़े रहे उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया 1908 ई. मैं राजद्रोह का अभियोग लगाकर 6 वर्ष की जेल दी गई जिसके विरोध में नागपुर मैं मजदूरों ने पड़ताल की उनका स्वराज्य बहिष्कार तथा राष्ट्रीय शिक्षा में विश्वास था |

उन्होंने नारा दिया स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है जिसे मैं लेकर रहूंगा 1906ई. में कांग्रेस द्वारा स्वराज्य प्राप्ति के लक्ष्य की घोषणा तथा 1916 ई. में होम रूल आंदोलन मैं उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा वे लाजपत राय व बिपिन चंद्र पाल के साथ कांग्रेस के उग्रवादी नेताओं में रहे

वे समाज सुधार कार्य में ब्रिटिश हस्तक्षेप के विरोधी थे एक विद्वान के रूप में उन्होंने ओरियन गीता रहस्य व आर्कटिक होम इन द वेदाज नामक ग्रंथ लिखे अपने जीवन के अंतिम समय में वैलेंटाइंस शिरोल द्वारा उन्हें भारतीय अशांति का जनक कहने पर उसके विरुद्ध मानहानि के मामले में व्यस्त रहे 1 अगस्त1920 ई. को उनकी मृत्यु हो गई |

बंकिम चंद्र चटर्जी krantikari Bankim Chandra Chatterjee (1838 – 1894 ई.)

बंकिम चंद्र का जन्म 1838 ई.में एक धनी परिवार में हुआ था1858 ई. मैं उन्होंने स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण की तथा कलकत्ता विश्वविद्यालय में प्रथम कृति दुर्गेश नंदिनी थी जिसने बंगाल साहित्य में एक नव युग का प्रारंभ किया उन्होंने  बंग दर्शन नामक समाचार पत्र का प्रकाशन किया तथा इसके माध्यम से किसानों की सोचनीय स्थिति तथा सामाजिक कुरीतियों पर प्रकाश डाला

बकिम की सर्वाधिक विख्यात रचना आनंदमठ है जिसमें उन्होंने बंगाल के सन्यासी विद्रोह का वर्णन किया इस ग्रंथ में उन्होंने – वंदे मातरम नामक ग्रंथ लिखा जो आगे चलकर भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का प्रेरक एवं बन गया 1894 ई.में56 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो गई |

चंद्रशेखर आजाद krantikari Chandra Shekhar Azad (1906 – 1931 ई.)

चंद्रशेखर आजाद भारत के अमर शहीदों में अग्रणी पंक्ति में है उनका जन्म 1906 ई. मैं हुआ था असहयोग आंदोलन के दौरान यह गिरफ्तार कर लिए गए तथा अदालत में पूछताछ के दौरान इन्होंने अपना नाम आजाद अपने पिता का नाम स्वतंत्रता तथा अपने निवास स्थान जेल बताया काकोरी लूटपाट की घटना में यह भी शामिल थे |

किंतु भाग निकले यह हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन से सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे तत्पश्चात उन्होंने क्रांतिकारियों से संपर्क स्थापित किया 1928 ई. में  उन्होंने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना की तथा इसके सर्वोच्च नेता बन गए |

वे इस पार्टी के सैन्य विभाग के प्रमुख बने वायसराय की ट्रेन को उड़ाने का षड्यंत्र, लाहौर षड्यंत्र पंजाब व्यवस्थापिका में बम विस्फोट, सांडर्स की हत्या तथा दिल्ली षड्यंत्र आदि विविध क्रांतिकारी (krantikari) गतिविधियों से वे संबंध रहे 1931 ई. मैं

इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में अकेले आजाद को पुलिस टोली ने घेर लिया और मुठभेड़ के पश्चात पकड़े जाने की आशंका देखते हुए आजाद ने अंतिम गोली शाम को मार तथा राष्ट्र के नाम शहीद हो गए |

लाला लाजपत राय krantikari Lala Lajpat Rai (1865 – 1928)

लाला लाजपत राय का जन्म 1865 ई. में पंजाब में हुआ था उन्होंने अपना जीवन एक वकील के रूप में प्रारंभ किया था तथा लाहौर में बस गए वे शेर – ए – पंजाब के नाम से भी विख्यात है |

वे  एक सच्चे राष्ट्रवादी थे वे आर्य समाज से भी जुड़े रहे तथा उन्होंने डी. ए . वी. कॉलेज की स्थापना मैं महत्वपूर्ण योगदान दिया फुल होने पंजाबी तथा वंदे मातरम नामक दैनिक समाचार – पत्रों का प्रकाशन आरंभ किया अंग्रेजी साप्ताहिक पत्र द पीपल, का संपादन किया वे गरम पंथी नेता थे |

उन्होंने ह्युम द्वारा कांग्रेस की स्थापना को सेफ्टी वाल्व कहां वे 1888 ई. मैं इलाहाबाद अधिवेशन में कांग्रेस से जुड़े 1905 ई. मैं बंगाल विभाजन के समय उन्होंने इंग्लैंड जाकर वहां के जनमत को कर्जन के विरुद्ध करने का प्रयत्न किया था

कृषक उन्हें कुछ समय के लिए आंदोलन में उनकी सक्रिय भूमिका के कारण सरकार ने 1907 ई. में उन्हें कुछ समय के लिए मांडले निर्वाचित कर दिया था 1907 ई.में उन्हें अध्यक्ष बनाने की मांग को लेकर सूरत अधिवेशन मैं कांग्रेस का विभाजन हो गया था |

1916 ईस्वी में उन्होंने अमेरिका में इंडिया होम रूल लिंग की स्थापना की इसी दौरान उन्होंने अनेक विज्ञान पुस्तके यथा – यंग इंडिया, इंग्लैंडस डेब्‍ट टू इंडिया लिखी उन्होंने 1920 ईस्वी में ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के प्रथम सम्मेलन की अध्यक्षता की हालांकि वे गांधीजी के असहयोग कार्यक्रम से पूर्णत: सहमत न थे |

तथापि 1920 ईस्वी में कांग्रेस से कोलकाता में हुए विशेष अधिवेशन में उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया था इसके बाद वे स्वराज्य पार्टी से जुड़े तथा केंद्रीय व्यवस्थापिका के सदस्य बने 1920 ईस्वी में दंगों के बाद स्वधर्म की ओर झुकाव बड़ा तथा

उन्होंने 1925 ई. मैं हिंदू महासभा के अधिवेशन की अध्यक्षता की साइमन कमीशन के विरुद्ध में 30 अक्टूबर, 1928 ई. को एक जुलूस का नेतृत्व करते लालाजी पर पुलिस अधिकारी सांडर्स ने लाठीचार्ज करवाया जिससे लालाजी घायल हो गए तथा 7 नवंबर 1928 ई. को लाला जी की मृत्यु हो गई |

विनायक दामोदर सावरकर krantikari Vinayak Damodar Savarkar (1883 – 1966 ई.)

भारत के क्रांतिकारियों में वी. डी. सावरकर को अत्यंत उच्च स्थान प्राप्त है उनका जन्म 1883 ई. में भागूर गांव (महाराष्ट्र) मैं हुआ था उन्होंने आरंभ से ही स्वयं को क्रांतिकारी (krantikari) गतिविधियों से जोड़ लिया था |

उन्होंने महाराष्ट्र में चित्र मंडल की स्थापना की जिसका मुख्य उद्देश्य भारत को स्वतंत्रता दिलाना था उन्होंने 1940 ई. मैं मित्र मेला नामक क्रांतिकारी(krantikari) संगठन की स्थापना की जो बाद में अभिनव भारत के रूप में परिवर्तित हो गई नासिक में बम बनाने की फैक्ट्रियां स्थापित की तथा स्वदेशी आंदोलन के दौरान विदेशी वस्त्रों की जबरदस्त होली जलाई

तत्पश्चात वे लंदन चले गए तथा श्यामजी कृष्ण वर्मा की इंडिया इंग्लैंड होमरूल सोसाइटी से जुड़ गए उन्होंने वहां फ्री इंडिया सोसाइटी की स्थापना की उन्हें 1910 ई. मैं गिरफ्तार कर लिया गया तथा भारत भेजा गया |

किंतु मार्सी लीज के निकट जहाज से उन्हें मुक्त करवा दिया गया तथा वे फ्रांस चले गए किंतु वे पुन: बंदी बना लिए गए तत्पश्चात उन्हें बंदी बनाकर उन पर अभी और चलाया गया तथा उन्हें देश निर्वासन का दंड देकर अंडमान भेज दिया गया 1937 ई. मैं उन्हें रिहा किया गया |

महात्मा गांधी जी की हत्या में उन पर भी संदेह किया गया किंतु इसका आधार नहीं था 1966 ई. मैं उनकी मृत्यु हो गई वे एक अच्छे इतिहासकार भी थे तथा उन्होंने 1857 की क्रांति  का भारत का प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम नामक ग्रंथ लिखा इन्हें लंदन से इंडिया हाउस जैसे क्रांतिकारी (krantikari) संगठन से संबंध रखने के कारण 1910 मैं गिरफ्तार कर लिया और बंदी बनाकर 8 जुलाई 1910 को जहाज से भारत लाया जा रहा था |

तो वे भागने के लिए समुद्र में कूद गए लेकिन पुणे गिरफ्तार करके अंडमान  की सेल्यूलर जेल में भेज दिया

विपिन चंद्र पाल krantikari Bipin Chandra Pal(1858 – 1932)

भारतीय स्वतंत्रता के प्रमुख क्रान्तिकारी bharat ke pramukh krantikari विपिन चंद्र पाल इनका जन्म 1858में हबीबगंज (वर्तमान बांग्लादेश) मैं हुआ यह केशवचंद्र से प्रभावित होकर ब्रह्म समाज के अनुयाई बन गए इन्होंने इंग्लैंड में स्वराज नामक पत्रिका निकाली इन्हें

भारत के क्रांतिकारी (krantikari) विचारों का जनक कहा जाता है यह गरम विचारधारा के मशहूर नेता थे लाल- बाग – पाल ने मिलकर 1905 के बंगाल विभाजन का विरोध किया इन्होंने कांग्रेसी की नीति को भिक्षावृत्ति की नीति कहकर आलोचना करते हुए कहां था

इस नीति से स्वराज्य नहीं मिलेगा इन्होंने परी दर्शक नामक साप्ताहिक आरंभ किया इन्होंने न्यू इंडिया नामक अंग्रेजी साप्ताहिक भी आरंभ किया

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