1857 ki kranti

1857 की क्रांति- (1857 ki kranti)

लॉर्ड डलहौजी द्वारा अपनाएं गई गोद निषेध नीति से अनेक भारतीय राजा नाराज थे झांसी के शासक गंगाधर राव की 1853 में निसंतान स्थिति में मृत्यु हो गई थी और उनके दत्तक पुत्र को ( गोद लिया हुआ पुत्र) अंग्रेजों ने झांसी का राजा मानने से इनकार कर दिया था

इस कारण झांसी की रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से नाराज थी
1856 मैं मराठों के पेशवा बाजीराव द्वितीय की मृत्यु होने के बाद उसे दी जाने वाली पेंशन अंग्रेजी सरकार द्वारा बंद कर दी गई थी इस कारण उनके पुत्र नाना साहब भी अंग्रेजों से नाराज थे

लॉर्ड डलहौजी ने मुगल सम्राट बहादुर शाह द्वितीय को लाल किला खाली करने की धमकी दी थी गवर्नर जनरल लॉर्ड कैनिंग ने भी 1856 मैं कहा था कि बहादुर शाह द्वितीय की मृत्यु के बाद मुगल सम्राट की पहली समाप्त कर दी जाएगी इस कारण भी बहादुर शाह भी अंग्रेजों से नाराज था

अंग्रेजों द्वारा भारत में अनेक समाज सुधार किए गए थे परंतु रूढ़ीवादी भारतीयों ने इस समाज सुधारकों का विरोध किया ईसाई मिशनरियों द्वारा भारत में ईसाई धर्म के प्रचार  के साथ – साथ भारतीयों का धर्म परिवर्तित भी करवाया था जिस से भी भारतीय नाराज थे

अंग्रेजी सरकार ने 1850 मैं धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम (लेक्स लौकी कानून) बनाया था जिसके अनुसार कोई भी भारतीय अपना धर्म छोड़कर ईसाई धर्म स्वीकार करता है तो उसे पैतृक संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा इस कानून से भी भारतीय नाराज थे

प्रशासनिक दृष्टि से भी भारतीयों के साथ भेदभाव किया जाता था और भारतीयों को उच्च पदों पर नहीं बैठाया जाता था सेना में भारतीयों को सूबेदार से ऊंचा पद नहीं दिया जाता था इस कारण पढ़े-लिखे भारतीय अंग्रेजों से नाराज थे

आर्थिक दृष्टि से भी अंग्रेजों ने भारतीय कृषि , उद्योग व्यापार की हानि पहुंचाई थी इस कारण भी अंग्रेजों से नाराजगी थी

क्रांति का तात्कालिक कारण चर्बी वाले कारतूस को माना जाता है जिनका प्रयोग एनफील्ड नमक राइफल में किया जाता था भारतीय सेना में पूर्व में ब्राउन देश राइफल का प्रयोग होता था परंतु 1856 मैं इसके स्थान पर एनफील्ड राइफल का प्रयोग किया जाने लगा कहा जाता है

कि एनफील्ड राइफल के कारतूस पर ड्राइवर सूअर की चर्बी लगी होती थी जिनका सैनिकों द्वारा विरोध किया गया था

चर्बी वाले कारतूसो का विरोध करने वाला पहला सैनिक मंगल पांडे था जो कोलकाता के निकट बैरकपुर छावनी का 34 वी NI का  ( नेटिव इन्फेंट्री) का सैनिक था मंगल पांडे ने चर्बी वाले  कारतूसो के विरुद्ध मैं 29 मार्च 1857 को अपने अधिकारी मेजर बाग और सार्जेंट  ह्यूसन को गोली से उड़ा दिया

इस कारण 8 अप्रैल 1857 को मंगल पांडे को फांसी दे दी गई मंगल पांडे को भारत में 1857 की क्रांति (1857 ki kranti) का  पहला  शहीद माना जाता है
क्रांति की योजना – कहा जाता है कि 1857 की क्रांति (1857 ki kranti) की योजना अजीमुल्ला खा और रानोजी  बापू ने लंदन में तैयार की थी

इस क्रांति के प्रचार का माध्यम रोटी और कमल को बनाया गया था
क्रांति को आरंभ करने की तिथि 31 मार्च 1857(1857 ki kranti) निर्धारित की गई परंतु क्रांति समय से पूर्व ही 10 मई 1857 को मेरठ से आरंभ हो गई

क्रांति का आरंभ और विस्तार –

1857 की क्रांति(1857 ki kranti) के समय ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया व ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पामर्स्टन थे जबकि क्रांति के समय भारत के गवर्नर जनरल लार्ड कैनिंग थे

भारत में क्रांति का आरंभ 10 मई 1857 को मेरठ छावनी से हुआ था जहां सर्वप्रथम धन सिंह गुर्जर  के नेतृत्व में 20 वी NI ने विद्रोह किया था

मेरठ के सैनिकों ने 12 मई  को दिल्ली पहुंचकर वहां पर अधिकार कर लिया और मुगल सम्राट बहादुरशाह  द्वितीय को क्रांति का नेता घोषित कर दिया क्रांति के समय बहादुर शाह द्वितीय की आयु 82 वर्ष थी इस कारण दिल्ली में क्रांति का नेतृत्व उनके सेनापति बख्त खा ने किया

अंग्रेज अधिकारी हडसन और निकलसन ने  दिल्ली का विद्रोह दबाकर बहादुर शाह द्वितीय और उसकी पत्नी जीनत महल को दिल्ली में स्थित हुमायूं के मकबरे से गिरफ्तार कर लिया

बहादुर शाह और  पत्नी को रंगूल  (बर्मा) मैं निर्वासित कर दिया गया जहां 1862 मैं बहादुर शाह द्वितीय की मृत्यु हो गई 4 जून 1857 को झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के नेतृत्व में विद्रोह हुआ

लक्ष्मी बाई को महल परी के नाम से भी जाना जाता है रानी लक्ष्मीबाई 17 जून 1858 को अंग्रेज अधिकारी हयूरोज से लड़ते हुए कालपी नामक स्थान पर वीरगति को प्राप्त हुई

लक्ष्मी बाई के बारे में हयूरोज ने कहा था “सोए (मरे हुए) हुए क्रांति कारियो में एकमात्र मर्द रानी लक्ष्मीबाई थी

अवध अंग्रेजों का एक अधीनस्थ राज्य था परंतु अंग्रेजी सरकार ने 1856 में कुशासन के आधार पर अवध का अंग्रेजी साम्राज्य मैं विलिय कर लिया था
अंग्रेजी सरकार ने अवध की चीफ कमिश्नरी  बनाकर वहां का पहला कमिश्नर हेनरी लॉरेंस को नियुक्त किया

अवध की रानी बेगम हजरत महल ने 4 जून1857 को ही लखनऊ में विद्रोह कर दिया इस विद्रोह को कैंपबेल ने दबाया था

हजरत महल (लखनऊ) अवध के नवाब वाजिद अली शाह की  पत्नी थी और अपने अल्प आयु पुत्र बिरजिस कादिर के नाम से लखनऊ में शासन कर रही थी
हजरत महल को महक परी के नाम से भी जाना जाता है क्रांति के बाद हजरत महल नेपाल चली गई थी जहां गुमनामी में उसकी मृत्यु हो गई थी

5 जून 1857 (1857 ki kranti)को नाना साहब के नेतृत्व में कानपुर में विद्रोह हुआ इस विद्रोह में तात्या टोपे ने भी नाना साहब का सहयोग किया कानपुर के विद्रोह को कैंपबेल और हर्वलोक ने दबाया था

नाना साहब का वास्तविक नाम धोंधू पंथ था जबकि तात्या टोपे का वास्तविक नाम रामचंद्र पांडुरंग था तात्या टोपे ने भी ग्वालियर में क्रांति की थी परंतु ग्वालियर में हारने के बाद वह राजपूताना (राजस्थान) में आ गए थे

फैजाबाद में मौलवी अहमदुल्ला के नेतृत्व में क्रांति हुई अहमदुल्ला को डंका शाह के नाम से भी जाना जाता है इन्होंने1857 की क्रांति (1857 ki kranti) को जिहाद (धर्म युद्ध) घोषित किया था

अंग्रेजी सरकार ने मौलवी अहमदुल्ला को भगोड़ा घोषित करके इन पर 50,000 रुपए का इनाम भी रखा था फैजाबाद के विद्रोह को कर्नल रेनार्द ने दबाया था
इलाहाबाद में लियाकत अली के नेतृत्व में क्रांति हुई जिसे कर्नल नील ने दबा दिया
बर्रली (रूहेलखंड) मैं खान बहादुर के नेतृत्व में क्रांति हुई थी जिसे वीसेंट आयर और कैंपबेल ने दबाया था

बिहार में स्थित जगदीशपुर में जागीरदार कुंवर सिंह ने 12 जून 1857  को क्रांति(1857 ki kranti) की थी क्रांति के समय कुंवर सिंह की आयु 80 वर्ष थी कुंवर सिंह को बिहार का सिंह कहा जाता है

कुंवर सिंह के बाद जगदीशपुर में क्रांति का नेतृत्व उनके भाई पृथ्वी सिंह ने किया था जगदीशपुर की क्रांति का दमन वीसेंट आयर और विलियम ट्रेलर ने किया था

1857 की क्रांति(1857 ki kranti) के प्रमुख केंद्र और उसके नेतृत्व कर्ता

केंद्र नेतृत्व कर्ता
मेरठ धन सिंह गुर्जर
दिल्ली बहादुर शाह जफर और बक्त खा
झांसी लक्ष्मी बाई और तात्या टोपे
कानपुर नाना साहब तात्या टोपे
ग्वालियर तात्या टोपे
जगदीशपुर कुंवर सिंह
फैजाबाद मौलवी अहमदुल्लाह
इलाहाबाद लियाकत अली
बरेली (रुहेलखंड) खान बहादुर
असम मनीराम
अवध (लखनऊ) बेगम हजरत महल

1857 की क्रांति(1857 ki kranti) की असफलता के कारण

क्रांति का समय से पूर्व आरंभ होना

क्रांति का संपूर्ण भारत में  न फैलना

क्रांति में मध्यम व शिक्षित वर्ग का भाग न लेना

क्रांतिकारियों के पास संगठन एकता और नेतृत्व की कमी इस संदर्भ में जॉन लॉरेंस ने कहा भी था “अगर क्रांतिकारियों के पास एक भी योग्य नेता होता तो हम भारत में सदा के लिए हार जाते”
राजपूताना, पटियाला, नाभा, जींद, इत्यादि के शासकों द्वारा क्रांति में अंग्रेजों का सहयोग करना

इस संदर्भ में लॉर्ड कैनिंग ने एक बार कहा भी था “इन शासकों और सरदारों ने क्रांति में तूफान के आगे बांध का काम किया अन्यथा क्रांति का यह तूफान हमें कभी का उड़ा ले जाता”

क्रांति से संबंधित पुस्तकें

1. 1857(1857 ki kranti) -S.N सेन
2.   The Garet Rebbelion – अशोक मेहता
3.    माझा प्रवास – विष्णु भट्ट गोडसे
4.   The sepoy muting and the revolt of 1857 (1857 ki kranti) -R.c मजूमदार
5. The first wer of indion independence – V.D सावरकर
6. असवाब ए बगावत ए हिंद – सर सैयद अहमद खा

भारत सरकार ने क्रांति के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष मैं 1957 में S.N सेन और R.C मजूमदार को 1857 की क्रांति (1857 ki kranti) का इतिहास लिखने का कार्य सोफा था परंतु R.c मजूमदार का सरकार के साथ विवाद होने के कारण वह इस योजना से अलग हो गए औरS.N सेन ने ही क्रांतिक का इतिहास लिखा इस कारणS.N सेन को 1857 की क्रांति(1857 ki kranti) का सरकारी इतिहासकार कहां जाता है

1857 की क्रांति(1857 ki kranti) का स्वरूप

क्रांति सैनिक विद्रोह थी – जॉन शिले , मालेसन, ट्रेवेलियन
क्रांति हिंदू-मुस्लिम षड्यंत्र थी – विलियम टेलर
क्रांति राष्ट्रीय विद्रोह थी – बेंजामिन डिजी रैली
क्रांति सम्यत और बर्तता का संघर्ष थी – T.R होम्स
क्रांति सामंतवादी विद्रोह थी – जवाहरलाल नेहरू
क्रांति कटर पंक्तियों का ईसाइयों के विद्रोह संघर्ष थी – l.E.R ReeZ
क्रांति भारत का प्रथम  राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम, न राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था – R.C मजूमदार

1857 की क्रांति (1857 ki kranti) के परिणाम –

1857 की  क्रांति(1857 ki kranti) के पश्चात भारत सरकार अधिनियम 1858 बनाया गया जिसके अनुसार भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर दिया और भारत का शासन ब्रिटिश महारानी ने अपने हाथ में ले लिया जिसे ताज का शासन (क्राउन) का शासन कहां जाता है

1858 में ही भारत सचिव का पद सृजित किया गया और भारत का पहला सचिव चार्ल्स वुड को बनाया गया  क्रांति के पश्चात महारानी विक्टोरिया ने एक घोषणा की थी जिसे विक्टोरिया की घोषणा कहा जाता है

1 नवंबर 1858 को लॉर्ड कैनिंग ने इलाहाबाद में एक दरबार लगाकर विक्टोरिया की घोषणा को पढ़ा था जिसमें कहा गया था कि
( 1) भारतीय राजाओं को पुनः गोद लेने की अनुमति दी जाएगी
( 2) भारतीय धर्म और समाज में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा तथा समाज सुधार के कार्य स्थगित कर दिए जाएंगे
( 3) भारतीय देसी राज्यों का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय नहीं किया जाएगा
( 4) गवर्नर जनरल को वायसराय का पद दिया गया तथा भारत का पहला वायसराय लॉर्ड केनिंग को ही बनाया गया

गवर्नर जनरल ब्रिटिश प्रांतो का शासक देखेगा जबकि वायसराय देसी रियासतों का शासन देखेगा

2 जनवरी 1859 को क्रांति के समापन की घोषणा कर दी गई क्रांति के पश्चात सेन में सुधार करने के लिए पील आयोग गठित किया गया जिसमें यूरोपियन सैनिकों की संख्या में वृद्धि करने की सिफारिश की क्रांति से पूर्व यूरोपियन और भारतीय सैनिकों का अनुपात 1: 10 था जिसे क्रांति के बाद बंगाल में 1: 2 और मद्रास तथा मुंबई में 1: 3 कर दिया गया

राजस्थान में 1857 की क्रांति

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