रामगोपाल विजयवर्गीय

रामगोपाल विजयवर्गीय (ramgopalvijayvargiya)

रामगोपाल विजयवर्गीय – राजस्थान में आधुनिक कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया। इन्होंने बंगाल स्कूल की कला परम्परा को राजस्थान में आगे बढ़ाया। इन्होंने अनेक पत्र-पत्रिकाओं हेतु चित्रण कार्य किया। बंगाल. स्कूल तथा अजन्ता की कला से प्रेरित होकर उन्होंने वॉश तकनीक व टेम्परा दोनों ही माध्यम में चित्रण किया। इनके चित्रों की प्रदर्शनियाँ 1928 ई. के बाद आयोजित की जाने लगी थीं। चित्रों में सरलता तथा लयात्मकता के साथ-साथ रंगों की संगति चित्रों को सजीवता प्रदान करती है। रामगोपाल नारी चित्रण के कुशल कलाकार थे। रेखांकन के पश्चात् रंग पद्धति उनकी विशेषता थी। उनके चित्रों में राजस्थानी, अजन्ता एवं बंगाली शैली का प्रभाव तो रहा किन्तु उनकी मौलिक शैली पर इनका प्रभाव कभी नहीं पड़ा। उनकी अपनी मौलिक शैली के चित्रों में मेघदूत, रामायण गीत गोविन्द, उमर खैयाम, जातक कथाए, महाभारत तथा रागमाला आदि प्रमुख चित्र हैं।रामगोपाल विजयवर्गीय  ने विभिन्न विषयों को चित्रित किया। ग्रामीणबालाएँ, मजदूर, वृद्ध किसान, पशु-पक्षी, तमाशा दिखाते मदारी, सावन, गुब्बारे वाला, तीज तथा गणगौर आदि प्रमुख विषय चित्र हैं। इसके अतिरिक्त धार्मिक विषय पर भी चित्रण कार्य किया। धार्मिक विषयों में राम की वन यात्रा, विश्राम करते राम व सीता, जटायु वध, विरही राम, लक्ष्मण व सूर्पणखा, धृतराष्ट्र गांधारी, शिवमोह, साधु का तप, वानरों के साथ राम, कृष्ण-सुदामा, गंगावतरण, अर्जुन व उर्वशी चतुर्भुज विष्णु आदि प्रतिनिधि चित्रों के अतिरिक्त अनेक धार्मिक चित्र बनाए। इन्होंने मेघदूत, अभिज्ञान शाकुन्तलम्, विक्रमोवशीय कुमारसंभव, कादम्बरी, गीत गोविन्द, ऋतु संहार एवं बिहारी सतसई समेत अनेक साहित्यिक रचनाओं पर आधारित चित्र बनाए हैं

राम-जैसवाल

रामगोपाल विजयवर्गीय 

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