परमानन्द चोयल का जीवन परिचय parmanand choyal–परमानन्द चोयल.  का 1924 ई. कोटा जिले में जन्म हुआ। इनका पूरा नाम परमानन्द चोयल था। इनका राजस्थान के कला इतिहास में महत्त्वपूर्ण स्थान है। इन्होंने प्रारम्भ में बंगाल स्कूल शैली से प्रभावित होकर चित्रण किया। महाराजा स्कूल ऑफ आर्ट से 1948 ई. में कला का डिप्लोमा प्राप्त किया। यहाँ पर शैलेन्द्र नाथ डे तथा रामगोपाल विजयवर्गीय के सान्निध्य में उन्होंने टेम्परा तथा वॉश पद्धति में अनेक चित्रों का सृजन किया। इन्होंने टेम्परा तथा तैल रंगों में चित्रण किया। पाश्चात्य चित्रकार वॉन गॉग का इनके जीवन पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ा। इन्होंने यथार्थ के स्थान पर भावात्मक पक्ष को अधिक महत्त्व प्रदान किया। वॉन गॉग के चित्र ‘धान के खेत पर कौवे के आधार पर चोयल ने भी ‘झोपड़े के कौवे’ नामक चित्र बनाया। इन्होंने वॉन गॉग पर एकांकी लेखन तथा निर्देशन भी किया। उन्होंने तैल चित्रण को माध्यम के रूप में अपनाकर उसको पतला तथा पारदर्शी रूप में प्रयोग किया है। यह उनकी विशेषता मानी जाती है। राजस्थान ललित कला रेखांकन तथा तैल रंगों का प्रयोग कर भैंसों के चित्रण की श्रृंखला बनाई जिसे अपार ख्याति प्राप्त हुई और उन्हें ‘भैंसों का चितेरा’ कहा गया है। आपने नारी चित्रण को भी कुशलतापूर्वक अंकित किया। आपने ‘माँ व शिशु’ विषय को आधार बनाकर कई चित्र बनाये। अकादमी का राज्य पुरस्कार आपको प्राप्त हुआ। उन्होंने शारीरिक गठनशीलता के साथ भावात्मक अभिव्यक्ति को मिश्रित कर एक नई रचना का प्रादुर्भाव किया। इन्होंने छायाकला व तेल चित्रण में भी कार्य किया

 

देवकीनन्दन-शर्मा

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