अवनीन्द्रनाथ ठाकुर

अवनीन्द्रनाथ ठाकुर(avanindra nath tagore)

जन्म – 07 अगस्त 1871 जन्माषटमी  के दिन पूर्वी बंगाल के जोरासंको प्रान्त में एक ठाकुर परिवार में हुआ था आरंभिक  विधालय से ग्रहण करने के पश्चात आपने संस्कृत , फारसी आदि भाषाओ में ज्ञान प्राप्त किया | एव संगीत की भी शिक्षा प्राप्त की | आपके पिता गगनेन्द्रनाथ ठाकुर , चाचा रविंद्रनाथ से साहित्य, संगीत, काव्य ,चित्रकला, की शिक्षा प्राप्त की थी | सन  1895 ई. तक आपने यूरोपीय शैली के लघु चित्रो को अपना प्रेरणा का आधार बनाया |

कला गुरू – अवनीन्द्रनाथ ठाकुर ने इथालियन कलाकार श्री गिल्हाद्री एवं ब्रिटिश कलाकार
पामर से विधिवत कला की शिक्षा प्राप्त की सन 1901 से 1902 तक जापानी कलाकार ताइकान व हिंसिधा जो की ठाकुर परिवार के अथिति के रूप में कलकता आये थे आपनेउनसे वाश पद्धति को सिखा और स्वयं ने भी इस शैली में अनेको प्रयोग किये उमरख्याम,विरयीयक्ष,गणेशजननी वाश पद्धति में बने महत्वपूर्ण चित्र है |

शिष्य परम्परा– अवनीन्द्रनाथ ठाकुर 1905 से 1915 ई. तक बंगाल स्कूल के प्रिंसिपल रहें | इस समय आपके शिष्यो में असितकुमार हलदार ,नन्दलाल बसु , अब्दुल रहमान , देवी प्रसाद राय चौधरी ,शारदा उकील आधि थे | 1907 ई. में अपने बडे भाई गगनेंद्रनाथ टैगोर के साथ मिलकर  इंडियन सोसाइटी ऑफ ओरिएण्टल आर्ट की स्थापना की जिसके द्वारा पूर्वी कला मूल्यों एवं आधुनिक भारतीय कला में चेतना जाग्रत हुई

 

अवनीन्द्रनाथ ठाकुर

नन्दलाल बसु

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