कला का अर्थ Meaning of art कला क्या है

कला का अर्थ Meaning of art

कला का अर्थ (Meaning of art)

कला शब्द संस्कृत कि क़़ल धातू से बना है कला संस्कृति की सुन्दरतम् अनुभूति है। जो संस्कृति जितनीउदार होती है, उसकी कला में उतना ही सूक्ष्म सौन्दर्य सहजसाकार होता है। उदात्तता की दृष्टि से प्राचीन भारतीय संस्कृतिविश्व में श्रेष्ठ है। अनादिकाल से ही कला के प्रति मानव के हृदय में स्वाभाविक आकर्षण रहा है।

कला मानव आत्मा के बाह्य और आन्तरिक संसार के प्रभाव की प्रतिक्रिया है, इसलिए वह आत्मा की अभिव्यक्ति है। कलाकार जिस भावना को व्यक्त करना चाहता है, उसे कितने । सशक्त रूप में व्यक्त कर सकता है। कला शब्द “कलसंख्याने’ धातु से अच एवं टाप प्रत्यय के संयोग से निर्मित है। जिसका तात्पर्य है स्पष्ट अभिव्यक्ति। “कलाति” अर्थात् सुख प्रदान करने वाली मधुर कृति भी कहलाती है।

कला का अर्थ(Meaning of art) -कला शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग ऋग्वेद के आठवें मण्डल में।

“यथा कलां यथा शफं” के रूप में प्रयुक्त हुआ भारत में प्राचीनकाल में कला के लिए शिल्प शब्द का भी प्रयोग हुआ। भरतमुनि ने अपने नाट्यशास्त्र में शिल्प और कला दोनों शब्दों का अलग-अलग प्रयोग किया। “न तज्जानं न तच्छिल्पं न सा विद्या न साकला।’

भारतीय दर्शन में कला को “सत्यं, शिवम्, सुन्दरम्” रूप में माना गया। रवीन्द्रनाथ ठाकुर का मानना है कि “जो सत्य है, जो सन्दर है, जो कल्याणकारी है वही कला है।

गाँधी जी ने -कला को आत्मा का ईश्वरीय संगीत कहा है।

भारत में जीवन से जडे प्रत्येक कार्य को कला मानते हए कलाओं की संख्याएँ निर्धारित की गई हैं। जैसे वात्स्यायन के कामसूत्र में (64) चौसठ, ललितविस्तर में (86) छियासी, शुक्रनीतिसार में (64) चौसठ कलाओं एवं प्रबन्ध कोष में (72) बहत्तर प्रकार की कलाओं का वर्णन प्राप्त होता है।

कला की परिभाषाएँ

कला कल्याण की जननी है। इस धरती पर मनुष्य की उदयवेला का इतिहास कला के ही हाथों से लिखा गया।

कला की परिभाषा(कला का अर्थ Meaning of art)

‘प्लेटो’ के अनुसार -प्रत्येक व्यक्ति सुन्दर वस्तु को अपना प्रेमास्पद चुनता है, अत:कला का प्राण सौन्दर्य है। उन्होंने कला को सत्य की अनुकृति माना  है।

महात्मा गाँधी – कला आत्मा का ईश्वरीय संगीत हैं।

रविन्द्र नाथ टैगोर(कला का अर्थ Meaning of art) – जो सत्य है सुन्दर है कल्याणकारी है वही कला है।

भारतीय दर्शन – कला को “सत्यं, शिवम्, सुन्दरम्” रूप में माना गया।

‘अरस्तू‘ – अरस्तू उसे अनुकरण कहते हैं।

 हीगल(कला का अर्थ)-  कला को आदि भौतिक सत्ता को व्यक्त करने का माध्यम माना है।

‘क्रौचे’ – कला बाह्य प्रभाव की आन्तरिक अभिव्यक्ति है।

‘टॉल्सटॉय‘ – क्रिया, रेखा, रंग, ध्वनि, शब्द आदि के द्वारा भावों की वह

अभिव्यक्ति जो श्रोता, दर्शक और पाठक के मन में भी वही भाव जागृत कर दे, कला है।

‘फ्रॉयड न(कला का अर्थ)- कला को मानव की दमित वासनाओं का उभार माना है।

‘हरबर्ट रीड’ (कला का अर्थ)- अभिव्यक्ति के आह्लादक या रंजक स्वरूप को कला मानते हैं।

‘टैगोर’ के अनुसार(कला का अर्थ), – मनुष्य कला के माध्यम से अपने गंभीरतम अन्तर कीअभिव्यक्ति करता है।

‘प्रसाद जी’ के अनुसार,(कला का अर्थ) – ईश्वर को कर्त्तव्य शक्ति का मानव द्वारा शारीरिक तथा । मानसिक कौशलपूर्ण निर्माण कला है।

‘डॉ. श्याम सुन्दर दास‘ के अनुसार,- जिस गुण या कौशल के कारण किसी वस्तु उपयोगी गुण और सुन्दरता आ जाती है, उसको कला की संज्ञा दी जाती है।

‘पी.एन. चौयल’ के अनुसार, – कला आदमी को अभिव्यक्ति देती है।

कला के प्रकार -कला के कई प्रकार होते हैं और इन प्रकारों का परिगणन भिन्न-भिन्न रीतियों से होता है।

(क) मोटे तौर पर जिस वस्तु, रूप अथवा तत्त्व का निर्माण किया जाता है, उसके नाम पर इस कला का प्रकार कहलाता है, जैसे-वास्तुकला या स्थापत्य कला : अर्थात् भवन-निर्माण कला, जैसे-दुर्ग, प्रासाद, मंदिर, स्तूप, चैत्य, मकबरे आदि-आदि।

मूर्तिकला : पत्थर या धातु की छोटी-बड़ी मूर्तियाँ।

चित्रकला : भवन की भित्तियों, छतों या स्तम्भों पर अथवा वस्त्र, भोजपत्र या कागज पर अंकित चित्र।

मृद्भाण्डकला : मिट्टी के बर्तन।

मुद्राकला : सिक्के या मोहरें।

(ख) कभी-कभी जिस पदार्थ से कलाकृतियों का निर्माण किया जाता है, उस पदार्थ के नाम पर उस कला का प्रकार जाना जाता है, जैसे- प्रस्तरकला : पत्थर से गढ़ी हुई आकृतियाँ।

धातुकला : काँसे, ताँबे अथवा पीतल से बनाई गई मर्तियाँ।

दंतकला : हाथी के दाँत से निर्मित कलाकृतियाँ।

मत्तिका-कला : मिट्टी से निर्मित कलाकृतियाँ या खिलौने।

चित्रकला : ऊपर कहे गये सामान।

(ग) मूर्तिकला भी अपनी निर्माण शैली के आधार पर प्राय: दो प्रकार की होती है,

जैसे- मूर्तिकला : जिसमें चारों ओर तराशकर मूर्ति का रूप दिया जाता है। ऐसी मूर्ति का । अवलोकन आगे से, पीछे से तथा चारों ओर से किया जा सकता है।

 

 

भारतीय शिल्प षडंग

 

कला का अर्थ

 

भारतीय शिल्प षडंग

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