बीकानेर चित्र शैली ( bikaner chitra shaili )

Bikaner Chitra Shali बीकानेर चित्र शैली

बीकानेर चित्र शैली ( bikaner chitra shaili ) का उद्भव और विकास  बीकानेर के महाराजा अनूप सिंह भी कला प्रेमी शासक थे बीकानेर चित्र शैली ( bikaner chitra shaili ) के प्रारंभिक चित्र महाराजा रायसिंह के समय में चित्रित भागवत पुराण माने जाते हैं महाराजा रायसिंह ने स्वयं 1604 ई.से 1611 ई. तक अनेक कलाकृतियों का संग्रह किया जिसमें रागमाला उल्लेखनीय है

महाराजा अनूप सिंह द्वारा बीकानेर चित्र शैली ( bikaner chitra shaili ) के विकास में योगदान- बीकानेर के महाराजा अनूप सिंह भी बीकानेर चित्र शैली ( bikaner chitra shaili ) के प्रवर्तक माने जाते हैं वे साहित्य एवं कला के संरक्षक थे उन्होंने दिल्ली तथा लाहौर के कलाकारों का सम्मान किया ये चित्रकार पाल शैली में अपभ्रंश शैली मैं चित्रों का निर्माण करते थे

परंतु बीकानेर आकर उन्होंने अनूप सिंह के अनुकूल भारतीय कथाऔ के चित्र बनाएं अनूप सिंह के प्रसिद्ध दरबारी चित्रकार रुकनुद्दीन ने रसिकप्रिया तथा बारहमासा के उत्कृष्ट चित्र बनाएं रुकनुद्दीन के पुत्र साहिबउद्दीन ने भागवत पुराण से संबंधित चित्र बनाएं महाराजा अनूप सिंह के समय में मथेरण परिवार के मुन्नालाल, मुकुंद, चंदूलाल आदि चित्रकारों ने तथा उस्ता परिवार के कलाकारों ने बीकानेर शैली को चरमोत्कर्ष पर पहुंचा दिया

महाराजा राज सिंह द्वारा चित्रकला को प्रोत्साहन देना – महाराजा राज सिंह ने भी चित्रकला को प्रोत्साहन दिया इस समय रागमाला, शिकार के दृश्य तथा राज परिवार के लोगों के चित्र बड़ी संख्या में बनाए गए बीकानेर के महल लालगढ़  पैलेस छतरिया भी बीकानेर शैली की अपनी निजी विशेषता रखती है जिससे परंपरा को उस्ता परिवार आज भी निभा रहे हैं

बीकानेर चित्र शैली ( bikaner chitra shaili ) के प्रमुख चित्रकार –

रुकनुद्दीन , साहिबदीन , रहीम खाँ, नाथू अली राजा, कासिम अब्दुल्ला आदि प्रमुख चित्रकार थे

बीकानेर चित्र शैली ( bikaner chitra shaili ) की प्रमुख विशेषताएं

( 1) स्त्री आकृतियां
( 2) पुरुष आकृतियां
( 3) रंग
( 4) प्रकृति चित्रण
( 5) पशु – पक्षी चित्रण
( 6 ) हाशिए

मारवाड़ चित्र शैली

 

 

 

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