महाभारत (Mahabharat)

महाभारत (Mahabharat) का सम्पूर्ण इतिहास और काल क्रम

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  1. वास्तविक नाम-महाभारत (Mahabharat)
  2. प्रारम्भिक नाम-जय, भारत
  3. अन्य नाम-कार्ण वेद, पंचमवेद, शत-साहस्री संहिता
  4. रचनाकार-वेद व्यास, (कृष्ण द्वैपायन)

5.महाभारत (Mahabharat) की रचनाकार के सम्बन्ध में विभिन्न मत

(i) डेनमार्क के डॉ. सोर्यनसेन, जोजफ डालमान, गजानन माधव मुक्तिबोध एवं अन्य प्रख्यात इतिहासकारों के अनुसार महाभारत (Mahabharat) की रचना एक ही व्यक्ति ने की थी और वै वेद व्यास या कृष्णद्वैपायन थे, जिन्होंने इस महाकाव्य का प्रणयन किया था.

(ii) दुर्गाभागवत, प्रो. मैक्समूलर, प्रो. ई. वाशबर्न हॉपकिन्स महाभारत (Mahabharat) का एक रचनाकार होना नहीं स्वीकारते.

(iii) प्रो. मैक्समूलर के शब्दों में- “ महाभारत (Mahabharat) किसी एक कवि की कृति कभी नहीं हो सकती और रचयिता अवश्य मनुप्रोक्त धर्म के पक्के अनुयायी ब्राह्मण रहे होंगे.”

(iv) प्रो. ई. वाशबर्न हॉपकिन्स के शब्दों में “ The epic was composed not by any person nor even by one generation, but by several;; it is primarily the story of an historic incident told by the glorifier of kings, the domestic priest & the bard, who are often one.”

(v) दुर्गाभागवत के शब्दों में “ महाभारत (Mahabharat), स्पष्ट ही है. एक व्यक्ति की कृति नहीं है. व्यास ने’ जय ‘ की रचना की. वैशम्पायन ने’ भारत ‘ की और ‘ सौति’ ने ‘ महाभारत (Mahabharat)’, यह सर्वश्रुत है. व्यास ने ‘ जय’ के रूप में एक आदर्श निर्माण कर जो विशाल पट एवं परिमाणों को रचा, कलाकृति को जो शिल्प दिया, वैशम्पायन और सौति ने उत्तरोत्तर उन्हीं का विस्तार किया और समापन किया. ”

(vi) मोनियर विलियम्स के शब्दों में ” It seems to have passed through several stages of construction and reconstruction, untill finally arranged and reduced to orderly written shape by a Brahman to Brahmans, whose names have been perposely con cealed, because the work is held to be too sacred to have been composed by any human author, and is therefore attributed to the divine sage Vyas.

(vii) गजानन माधव मुक्तिबोध के शब्दों में ‘ आज महाभारत (Mahabharat) और रामायण जिस रूप में हमें प्राप्त होते हैं, वह रूप ठीक इन्हीं दिनों बना. दोनों महाकाव्य इस युग के पहले भी थे; उनमें निरन्तर वृद्धि होती रही. शुंग और सातवाहन राजाओं के समय में उनमें बहुत कुछ वृद्धि हुई. फलतः दोनों ग्रन्थों के बहुत से अंश इस काल की अवस्था पर प्रकाश डालते हैं

6. महाभारत (Mahabharat) का रचनाकाल

(i) महाभारत (Mahabharat) का प्रारम्भिक रचनाकाल 800 ई. पू. माना जाता है और अंतिम संकलन गुप्तकाल तक माना जाता है.

(ii) महाभारत (Mahabharat) के अन्तःसाक्ष्य के आधार पर महाभारत (Mahabharat) का प्रणयन मात्र तीन वर्षों में पूरा हो गया था.

(iii) ऐहोल अभिलेख के अनुसार महाभारत (Mahabharat) का कालक्रम 3839 ई.पू. माना गया है.

(iv) भारतीय परम्परा की गणना के अनुसार इसका रचनाकाल 3000 ई.पू. माना गया है.

7. महाभारत (Mahabharat) युद्ध का कालक्रम

(i) अधिकांश साहित्यकार विभिन्न तथ्यों के आधार पर महाभारत (Mahabharat) युद्ध की संभावित तिथि 950 ई.पू. मानते हैं.

(ii) जोजफ डालमान महाभारत (Mahabharat) का रचना-काल ईसा पूर्व पाँचवीं और छठी शताब्दी से पूर्व होना माना है. वह इस काल में महाभारत (Mahabharat) की रचना होना स्वीकार करते हैं.

(iii) एफ.ई. पार्जीटर ने महाभारत (Mahabharat) के युद्ध का समय 950 ई.पू. के लगभग माना है .(iv) अर्थर मैकडोनेल एवं डॉ. विंसेट स्मिथ महाभारत (Mahabharat) के युद्ध का कालक्रम 1000 ई. पू. मानते हैं.

(v) वेलण्डी अण्यर के अनुसार महाभारत (Mahabharat) नामक युद्ध का प्रारम्भ 14 अक्टूबर, 1194 ई. पू. को हुआ। और अन्त 31 अक्टूबर, 1194 ई.पू. को हुआ.

(vi) डॉ. बी. पी. सिन्हा के मतानुसार यह युद्ध 1200 और 1000 के बीच के किसी काल में हुआ था

(vii) इलियट एवं डाउसन ज्योतिषीय तथ्यों के आधार पर ईसा से 1200 वर्ष पहले महाभारत (Mahabharat) का कालक्रम मानते हैं

(viii) डॉ. रतिलाल मेहता महाभारत (Mahabharat) युद्ध का कालक्रम ई. पू. 12 वीं शताब्दी मानते हैं

( ix) जर्मन विद्वान् अलब्रेट बेबर के मतानुसार महाभारत (Mahabharat)  का युद्ध पाणिनी के बाद हुआ था.

(x) डॉ. दत्त महाभारत (Mahabharat) के युद्ध का कालक्रम 1250 ई. पू. मानते हैं.

(xi) एच. एच. विल्सन के अनुसार महाभारत (Mahabharat) का युद्ध 1370 ई. पू. में घटित हुआ था.

(xii) लोकमान्य तिलक ने 1400 ई. पू. महाभारत (Mahabharat) युद्ध का कालक्रम माना है.

(xiii) ए. एस. अल्तेकर, पुशालकर, आर. एल. सिंह ने महाभारत (Mahabharat) के युद्ध का कालक्रम 1400 ई.पू. माना है.

(xiv) सत्यकेतु विद्यालंकार, काशी प्रसाद जायस-वाल के अनुसार महाभारत (Mahabharat) युद्ध का काल-क्रम 1424 ई. पू. माना गया है.

(xv) एलेक्जेण्डर कनिंघम ने महाभारत (Mahabharat) युद्ध का कालक्रम 1426 ई.पू. निर्धारित किया है.

(xvi) डॉ. एलिफिस्टन के मतानुसार महाभारत (Mahabharat) का युद्ध 1450 ई. पू. हुआ था.

(xvii) पाश्चात्य विद्वानों ने महाभारत (Mahabharat) का कालक्रम 1500 ई. पू. निश्चित किया है।

(xviii) पं. बलदेव उपाध्याय के मतानुसार महा-भारत युद्ध 1506 ई. पू. में लड़ा गया था.

(xix) ‘ कल्हण की राजतरंगिणी’ में महाभारत (Mahabharat) के युद्ध का काल 2448 ई. पू. माना गया है.

(xx) वराहमिहिर ने महाभारत (Mahabharat) के युद्ध का कालक्रम 2604 ई. पू. माना है.

(xxi) ‘ सर्च फार द इयर ऑफ भारतकार’ में श्रीराम साठे ने महाभारत (Mahabharat) युद्ध का कालक्रम 1876 ई. पू. माना है. |

(xxii) पण्डित जवाहर लाल नेहरू ने महाभारत (Mahabharat) युद्ध का कालक्रम 1400 ई.पू. माना है.

(xxiii) भारतीय ज्योतिष गणना के अनुसार महाभारत (Mahabharat) युद्ध की तिथि 3101 ई.पू. मानी गयी है.

8. महाभारत (Mahabharat) के विभिन्न नामों के रखे जाने का कारण एवं आशय

(1) महाभारत (Mahabharat) नामकरण

(a) 1 महाभारत (Mahabharat) के आदि पर्व 56 वाँ अध्याय के श्लोक 30 के अनुसार भारतवंशीय पुरुषों के महान् कृत्यों को समाहित करने के कारण इसका नाम महाभारत (Mahabharat) पड़ा.

(b) विभिन्न तथ्यों के अनुसार विशालतम ग्रन्थ होने के कारण प्रत्यय ‘ महा’ एवं भरतवंशीय पुरुषों से सम्बन्धित होने के कारण महाभारत (Mahabharat) नाम पड़ा.

(2) जय नामकरण:

(a)  पाण्डवों के विजय वर्णन के कारण महाभारत (Mahabharat) का प्रारम्भिक नाम ‘ जय’ था.

(b)  महाभारत (Mahabharat) में 18 का बारम्बार प्रयोग होने के कारण विद्वान् ‘ जय ‘ नामकरण हुआ मानते हैं. समरसार में’ ज ‘ अक्षर 8 का एवं य अक्षर 1 का बोधक है ‘ अंकानाम् वामतो गतिः ‘ इस आशय से’ जय ‘ का तात्पर्य 18 हुआ. उल्लेखनीय है कि महाभारत (Mahabharat) में 18’ अंक का कई बार प्रयोग हुआ है.

महाभारत (Mahabharat) में मुख्य पर्व 18 हैं, दोनों पक्षों की अक्षौहिणी सेना की संख्या 18 थी, महाभारत (Mahabharat) का युद्ध 18 दिन चला था, महाभारत (Mahabharat) के युद्ध होने के बाद धृतराष्ट्र 18 वर्ष तक जीते रहे थे, उसके बाद युधिष्ठिर ने 18 वर्ष तक शासन किया था, महाभारत (Mahabharat) में मंगलाचरण श्लोक की

आवृत्ति 18 बार हुई और श्रीमद्भगवद्गीता के अध्यायों की संख्या भी 18 थी. अतः जय नामकरण करना अर्थसूचक लगता है.

9. महाभारत (Mahabharat) के विभाग महाभारत (Mahabharat) की सम्पूर्ण कथा

अद्वितीय काव्य-शैली में 18 पर्यों में समाहित है, महाभारत (Mahabharat) के 18 पर्व निम्नलिखित

आदिपर्व- इसमें प्रथम से 19 अध्यायों में महाभारत (Mahabharat) की प्रारम्भिक कथावस्तु समाहित है.

(ii) सभा पर्व इसमें 20 से 28 अध्यायों में राज्य, सभाओं इत्यादि पर केन्द्रित कथावस्तु महाभारत (Mahabharat) में वर्णित है.

(iii) अरण्य पर्व-इसमें 29 से 44 अध्यायों में महाभारत (Mahabharat) में निर्वासन की विषयवस्तु को समाहित किया गया है.

(iv) विराट पर्व — इसमें 45 से 48 अध्याय तक भारतवंशीय राजाओं के अन्तर्वलह को मुख्य कथावस्तु बनाकर महाभारत (Mahabharat) में समाहित किया गया है.

(v) उद्योग पर्व-इस पर्व में 49 से 60 अध्याय तक विभिन्न योजनाएं क्रियान्वित की विषय-वस्तु को महाभारत (Mahabharat) में समाहित किया गया है.

(vi) भीष्म पर्व- इसमें 61 से 64 अध्याय तक महाभारत (Mahabharat) के युद्ध की प्रारम्भिक विषयवस्तु का चित्रण है.

(vii) द्रोण पर्व — इसमें 65 से 72 अध्याय तक महाभारत (Mahabharat) युद्ध का वर्णन है.

(viii) कर्ण पर्व — इसमें मात्र एक 73 वें अध्याय में युद्ध का वर्णन है.

(ix) शल्य पर्व-इसमें 74 से 77 अध्याय तक महाभारत (Mahabharat) के युद्ध का वर्णन है

(x) सौप्तिक पर्व- इसमें 78 एवं 79 अध्याय में जनसंहार का चित्रण किया गया है.

(xi) स्त्री पर्व-इसमें 79 से 83 अध्याय तक जनसंहार के उपरान्त होने वाले क्रन्दन एवं अन्य विषयवस्तु का वर्णन किया गया है.

(xii) शान्ति पर्व – इसमें 84 से 86 अध्याय तक की विषयवस्तु में समाहित इस पर्व में शान्तिजन्य तथ्यों को उल्लिखित किया गया है.

(xiii) अनुशासन पर्व- इसमें 87 से 88 अध्याय तक विधिजन्य तथ्यों को समाहित किया गया है.

(xiv) अश्वमेधिक पर्व-इसमें मात्र एक 89 अध्याय में पूर्व घटित तथ्यों के सामान्यीकरण का उल्लेख हुआ है.

(xv) आश्रमवासिक पर्व-इसमें 90 से 92 तक अध्याय न में वैराग्य प्रवृत्ति का चित्रण हुआ है.

(xvi) मौषल पर्व- इसमें मात्र 93 वें अध्याय में वैनाशिक तथ्यों को प्रस्तुत किया गया है

(xvii) महाप्रस्थानिक पर्व-इसमें 94 वें अध्याय में महाभारत (Mahabharat) की विषयवस्तु को समाप्ति की ओर अग्रसर किया है.

(xviii) स्वर्गारोहण पर्व-इसमें 95 वें अध्याय में महाभारत (Mahabharat) की कथावस्तु समाप्त हो जाती है और भारत वंशीय स्वर्ग के लिए प्रस्थान कर जाते हैं.

10. महाभारत (Mahabharat) लेखन का विकास क्रम

(i) प्रारम्भ में 8800 पद्य थे, जिसका नामकरण जय था. कालान्तर में पद्यों की संख्या 24,000 हो गई और महाभारत (Mahabharat) का नामकरण ‘ भरत’ या ‘ भारत’ हो गया. अंतिम संकलन के दौरान महाभारत (Mahabharat) में पद्यों की संख्या 1,00000 हो गई. जिसे महाभारत (Mahabharat). या शतसहस्री संहिता कहा गया.

11. वर्तमान में महाभारत में उपलब्ध पद्य संख्या

(i) वर्तमान में उपलब्ध महाभारत में श्लोकों की संख्या डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल के अनुसार 82,136 है.

(ii) गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित महाभारत में 86,600 श्लोक हैं. दक्षिणात्य पाठ के 6,584 एवं उवाचों की संख्या 7,033 मिलाकर महाभारत के श्लोकों की कुल संख्या 100217 हो गई है.

(iii) पुणे स्थित भाण्डारकर प्राच्य विद्या संशोधन मन्दिर द्वारा प्रकाशित महाभारत  में 1955 अध्याय एवं 73,820 श्लोक हैं. इसमें महाभारत के खिल 2 हरिवंशपुराण के 118 अध्याय एवं 6073 श्लोकों को मिलाकर कुल श्लोक संख्या 79,893 हो गई है.

(iv) महाभारत के आदिपर्व में 56 वें अध्याय में इदं शतसहस्त्रं श्लोकानाम् ‘ कहकर महाभारत में। लाख श्लोक होने की पुष्टि करता है.

(v) महाभारत के मत्स्यपुराण में उल्लिखित लक्षणेकेनयत् प्रोक्तम्’ एवं शान्तिपर्व में उल्लिखित ‘ कृतं शतसहस्त्रं हि श्लोकानामिदमुत्तमम्’ से महाभारत में एक लाख श्लोक होने की पुष्टि होती है.

12. महाभारत से उद्धृत आध्यात्मिक पंचरत्न

(i) श्रीमद्भगवद्गीता

(ii) विष्णु सहस्त्रनाम

(iii) अनुस्मृति (अनुगीता)

(iv) भीष्मस्तवराज

(v) गजेन्द्र मोक्ष

13. महाभारत में समाहित मूल विषय (कौरव-पाण्डवों के युद्ध) के सन्दर्भ में विभिन्न मत

(i) अधिकांश इतिहासकारों के अनुसार 950 ई. पू. कौरव एवं पाण्डवों के मध्य हुए ‘ भरत युद्ध ‘ का विस्तृत लेखन महाभारत में किया गया है.

(ii) प्रसिद्ध विद्वान् ‘ अर्थर ए. मैकडौनेल कौरव-पाण्डवों के युद्ध को प्राचीनतम् कुरू-पांचाल युद्ध का परिवर्तित रूप बतलाते हुए लिखते हैं

There can be little doubt that the original Kernal of the epic has as a historical background an ancient conflict between the two neighbouring tribes of the Kurus & Panchals, who finally coalesced into a single people.

(iii) डॉ. ग्रियर्सन के मतानुसार “ पांचाल देश के राजा द्रुपद ने द्रोणाचार्य का अपमान किया था, जिन्होंने कौरवों के यहाँ शरण ली थी. उसी अपमान का बदला चुकाने के लिए कौरव-पांचालों में युद्ध हुआ था. इस तरह ‘ महाभारत कौरव-पाण्डवों का नहीं, कौरव-पांचालों का युद्ध था. ‘

(iv) चिन्तामणि विनायक वैद्य भी कौरव-पाण्डवों के बजाय कौरव-पांचालों का युद्ध कहते हुए लिखते हैं But there is no reason to doubt that he (Vyas) wrote a history of the war between the Kurus and the Panchalas from personal knowledge.”

14. महाभारत रचना के रूप में

(i) डॉ. राजाराम जैन ने महाभारत की विशालता और उत्कृष्टतम स्वरूप को दृष्टि में रखकर इसे ‘ ग्रन्थराज’ कहा है.

(ii) अनेक विद्वानों ने महाभारत को प्राचीन भारत विश्वकोष ‘ माना है.

(iii) चाणक्य ने महाभारत को’ स्मृति ‘ माना है.

(iv) पाश्चात्य विद्वानों ने महाभारत को प्राचीन भागवतों का धर्मग्रन्थ माना है.

(v) आदिपर्व के प्रथम अध्याय के 61 वें श्लोक (गीता प्रेस संस्करण) 3 में तथा हरिवंश पुराण (पूना संस्करण) के भविष्य पर्व में 115 वें अध्याय के 43 वें श्लोक में महाभारत को महाकाव्य कहा गया है .

(vi) महाभारत के आदिपर्व (56-19) में’ जयो नामेतिहासोऽय ‘ श्रोतव्यो विजिगीपुणा’ लिखकर महाभारत को इतिहास के रूप में प्रस्तुत किया है.

(vii) विभिन्न विषयों के संकलनपूर्ण सज्जीकरण किए जाने के कारण महाभारत को संहिता भी कहा गया है.

15. महाभारत का प्रथम श्रवण

वेदव्यास ने सबसे पहले महाभारत अपने पुत्र शुक एवं अपने चार शिष्यों-सुमन्तु, जैमिनी, पैल एवं वैशम्पायन को सुनाई थी.

16. महाभारत उल्लिखित ब्रह्मा के जन्म

महाभारत में ब्रह्मा के निम्नलिखित सात जन्म होना बतलाया गया है।

(i) मानस ब्रह्मा
(ii) चाक्षुष ब्रह्मा
(iii) वाचस्पत्य
(iv) श्रावण
(v) नासिक्य
(vi) अण्डज हिरण्यगर्भ ब्रह्मा
(vii) कमलोद्भव (पद्मज) ब्रह्मा.

17. महाभारत में वर्णित सप्तद्वीप

महाभारत के अनुसार है सम्पूर्ण विश्व सात दीपों में बटा हुआ है
(i)जम्बू  (ii) शक) (iii) कुश (iv) शाल्मलि (v) पुष्कर (vi) श्वेता (vii) क्रौंच

18. महाभारत में वर्णित कौरव-पाण्डवों की सेना

(i).महाभारत में सात पांडवों एवं 11 कौरवों की अक्षौहिणी सेना होने का जिक्र किया गया है

(ii). महाभारत में एक अक्षौहिणी सेना में 21870 रथ 21870 हाथी पैदल सैनिक 109350 एवं 65610 घुड़सवार सैनिक थे

(iii) महाभारत में वर्णित तथ्यों के अनुसार पाण्डवों की सेना में 153090 रथ, 153090 हाथी, 765450 पैदल सैनिक एवं 459270 घुड़सवार सैनिक थे.

(iv) महाभारत के तथ्यानुसार कौरवों की सेना में 240570 रथ, 240570 हाथी, 1202850 पैदल सैनिक एवं 721710 घुड़सवार सैनिक थे. 19. महाभारत से उधृत श्रीमद्भगवद्गीता के सम्बन्ध में कुछ तथ्य

(i) अधिकांश इतिहासकार, साहित्यकार, विद्वान् एवं चिंतक श्रीमद्भगवद्गीता को महाभारत के भीष्मपर्व से लिया गया मानते हैं. भीष्म पर्व के भीष्म वध पर्व में गीता में 745 श्लोक होने का जिक्र किया गया है. इसमें 620 श्लोक कृष्ण द्वारा कथित, 57 श्लोक अर्जुन द्वारा कथित, 67 श्लोक संख्या के द्वारा एवं 1 श्लोक धृतराष्ट्र के द्वारा कथित बतलाया गया है.

(ii) महाभारत में वर्तमान में कृष्ण द्वारा कथित 571 श्लोक, अर्जुन द्वारा कथित 55 श्लोक, संजय द्वारा कथित 73 श्लोक एवं धृतराष्ट्र द्वारा कथित 1 श्लोक कुल 700 श्लोक उपलब्ध होते हैं.

(iii) वर्तमान में गीता प्रेस गोरखपुर के संस्करण के आधार पर श्रीमद्भगवद्गीता में 699 श्लोक हैं, जिसमें 573 कृष्ण द्वारा कथितं, 41 श्लोक संजय द्वारा एक धृतराष्ट्र तथा 84 श्लोक अर्जुन द्वारा कथित हैं.

(iv) श्रीमद्भगवद्गीता अठारह अध्यायों में विभक्त है, जिनका नामकरण निम्नलिखित हैं

(1) अर्जुन विषाद योग नामक प्रथम अध्याय

(2) सांख्य योग नामक द्वितीय अध्याय

(3) कर्मयोग नामक तृतीय अध्याय

(4) ज्ञानकर्म संन्यास योग नामक चतुर्थ अध्याय

(5) कर्म संन्यास योग नामक पंचम (5 वाँ) अध्याय

(6) आत्मसंयम योग नामक षष्ठम (6 वाँ) अध्याय

(7) ज्ञान विज्ञान योग नामक सप्तम (7 वाँ) अध्याय

(8) अक्षरब्रह्मयोग नामक अष्टम् (8 वा) अध्याय

(9) राजविद्याराजगुह्य योग नामक नवम् (9 वा) अध्याय

(10) विभूति योग नामक दशम् (10 वाँ) अध्याय

(11) विश्वरूपदर्शन योग नामक एकादशम (11 वॉ) अध्याय

(12) भक्तियोग नामक द्वादश (12 वाँ) अध्याय

(13) क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविभाग योग नामक त्रयोदश (13 वाँ) अध्याय

(14) गुणजयविभाग योग नामक चतुर्दशम् (14 वाँ) अध्याय

(15) पुरुषोत्तम योग नामक पंचदशम् (15 वाँ) अध्याय

(16) दैवासुर सम्पद् विभाग योग नामक षष्ठदशम् (16 वाँ) अध्याय

(17) श्रद्धाजयविभाग योग नामक सप्तदशम् (17 वाँ) अध्याय

(18) माक्षसंन्यास योग नामक अष्टदशम् (18 वाँ) अध्याय

20. श्रीमद्भगवद्गीता का महाभारत से सम्बद्धता के सन्दर्भ में विभिन्न मत

(i) अधिकांश विद्वान्, साहित्य, धर्मग्रन्थ श्रीमद्भगवद्गीता को महाभारत का अभिन्न अंश मानते हैं.

(ii) भगीरथ दीक्षित, सर मोनियर विलियम्स, न्यायाधीश तेसंग एवं अन्य पाश्चात्य विद्वान् श्रीमद्भागवद्गीता को महाभारत से असम्बद्ध मानते हैं और उनके अनुसार इसे बाद में जोड़ा गया था.

(iii) भगीरथ दीक्षित के शब्दों में ” कई आधुनिक विदेशी विद्वानों का कहना है कि युद्धभूमि में सात सौ श्लोकों का उपदेश देना सम्भव नहीं माना जा सकता है. अतएव कृष्ण ने या तो वास्तव में गीता का उपदेश अर्जुन को दिया ही नहीं, या यदि दिया हो तो उसका रूप अत्यन्त सूक्ष्म रहा होगा, जिसे बाद में किसी ने विस्तार प्रदान कर दिया.

(iv) सर मोनियर विलियम्स के शब्दों में 22 ” The real author of the Bhagvad Gita is unknown. Nor is it known when the work was inserted in the Bhisma-parva of the Mahabharata.

The author was probably an earnest Brahman & nominally a vaishanav, but really a philosopher whose mind was cast in a broad mould. He is supposed to have lived in India about the second or third century of our era.

(v) हॉपकिन्स गीता को’ क्षेपक ‘ मानते हैं और गार्वे इसे कॉम्पजिट प्रोडक्शन (संश्लिष्ट रचना) कहते हुए इसका रचनाकाल 200 ई. पू. मानते हैं. (vi) अर्थर ए. मैकडोनेस का मानना है कि श्रीमद्भगवद्गीता को बाणभट्ट के समय महाभारत में संलग्न किया गया था.

(vii) महाभारत में आदिपर्व की श्लोक संख्या 56 में’ पर्वोक्तं भगवद्गीता पर्व भीष्म-वधस्ततः ‘ तथा शान्ति पर्व (336-8) में अर्जुन विमनस्के च गीता भगवता स्वयम्’ लिखकर महाभारत से श्रीमद्भगवद्गीता के सम्बद्ध होने की पुष्टि की है.

(viii) शंकराचार्य ने भगवद्गीता को महाभारत का ही अभिन्न अंश माना है.

(ix) प्रख्यात विद्वान् चिन्तामणि विनायक वैद्य वेदव्यास को श्रीमद्भगवद्गीता का रचनाकार भाषागत भिन्नता महाभारत से के कारण अस्वीकार करते हुए लिखते हैं ” It’s grammel and construction are archaic It . strikes us as the language of an adopt using a spoken tongue.

We may instance the Bhagvad Gita, which, if not the composition of Vyasa, must at least, be that of Vaishampayana, whose date, from the evidence of language, must not have been very distant from the date of the upnishadas.”

21. महाभारत में वर्णित पर्वत .

(i) हैमावत, (ii) हेमकूट, (iii) निषाद, (iv) नील, (v) श्वेत, (vi) मलय, (vii) सुंगवन.

  1. महाभारत में वर्णित ऐतिहासिक तथ्य महाभारत में मगध, विदेह आदि राज्य, सीथियन, यूनानी आदि विदेशी जातियों राज्य, राजा से सम्बन्धित सिद्धान्त तत्कालीन सामाजिक, आर्थिक राजनीतिक परिस्थिति एवं धार्मिक क्रियाकलापों का विस्तार से वर्णन किया गया है.

23. महाभारत से जुड़े कुछ उल्लेखनीय तथ्य

(i) महाभारत में स्त्रियों के भिक्षुणी बनने का विरोध किया गया है तथा गुजारे के लिए धर्म का आडम्बर करने वालों को भी हेयदृष्टि से देखा गया है.

(ii) सभा पर्व के पंचम अध्याय के 73 वें श्लोक में स्त्रियों को अविश्वसनीय मानते हुए उन पर विश्वास नहीं करने का जिक्र हुआ है.

(iii) महाभारत में गृहस्थाश्रम को तीनों आश्रमों से अधिक श्रेष्ठ एवं लोकवेत्ताओं की गति का मार्ग बतलाया है.

(iv) महाभारत के उपसंहार (खिल) के रूप में जाना जाने वाले हरिवंशपुराण में वर्गों के सन्दर्भ में कहा गया है कि गृत्समद के पुत्र भुनक से शौनक एवं शौनक से ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र नामक चार पुत्र पैदा हुए थे. विष्णुपुराण उक्त तथ्य की पुष्टि करता है.

(v) महाभारत के सन्दर्भ में ‘ यन्न भारते तन्न भारते ‘ कहा गया है जिसका आशय यह है कि जो महाभारत में नहीं है वह भारतवर्ष में भी नहीं है अर्थात् ऐसा कुछ भी शेष नहीं रहा जिसका वर्णन महाभारत में नहीं किया गया हो.

(vi) महाभारत में धर्मोपदेश, वर्णव्यवस्था, पुरुषार्थ चतुष्टयम् युद्धकला कौशल, चिकित्सा, धर्म, दर्शन, ग्रह नक्षत्र तारादि के परिमाण वर्णन से लेकर कर्मयोग, शिक्षाप्रद आख्यान,’ यतोधर्मस्ततो जयः ‘ को प्रतिपादित करने वाली शिक्षा एवं अन्य कई तत्वों का विस्तार से वर्णन किया गया है

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