महंगे पेट्रोल के फायदे!

नीरज बधवार

दोस्तों, पेट्रोल के रेट इतने बढ़ गए हैं कि जिन लोगों ने 6 महीने पहले दहेज में मर्सिडीज़ मांगी थी वो अब हाथ जोड़कर इसके बदले ई रिक्शा मांग रहे हैं। लोगों का कहना है कि पेट्रोल इतना मंहगा हो गया है कि वो खरीद ही नहीं पा रहे। मेरा कहना है भाई, पेट्रोल खरीद नहीं पा रहे तो इससे तुम्हारे ही पैसे बच रहे हैं। मगर बजाए इस सेविंग के लिए सरकार को थैंक्यू कहने के, तुम उसे ही उल्टा-सीधा कह रहे हो।

और मैं पूछता हूं, पेट्रोल क्या सिर्फ आम लोगों के लिए महंगा हुआ है, सरकारों को भी तो देश में आग लगाने के लिए महंगा पेट्रोल खरीदना पड़ता है, पर क्या उन्होंने कभी शिकायत की? क्या कभी किसी दंगाई ने कहा कि साहब, पेट्रोल इतना महंगा हो गया…मैं पेट्रोल बम्ब ही नहीं बना पा रहा हूं! नहीं न, तो फिर आम आदमी ही पेट्रोल का रोना क्यूं रो रहा है? उसमें भी पेट्रोल कीमतों पर सबसे ज़्यादा नौटंकी तो वो लोग कर रहे हैं जो ऑफिस भी शेयरिंग ऑटो में ड्राइवर की गोदी पे लटकके जाते हैं।

वैसे भी हर चीज़ का दूसरा पक्ष भी होता है। हो सकता है सरकार ने तेल के दाम इसलिए बढ़ाए हों ताकि बढ़ती बेरोज़गारी से परेशान होकर देश का युवा खुद को आग न लगा ले। हो सकता है उसने पेट्रोल इसलिए महंगा किया हो ताकि लोग दहेज में कारें लेना ही बंद कर दें। सच तो ये है कि आज पेट्रोल इतना मंहगा हो गया है कि लड़की वाले अगर कार देना भी चाहें, तो लड़के वाले उनके खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस करवा दें।

अब मैं पूछता हूं कि सिर्फ एक पेट्रोल महंगा करने से अगर बेरोज़गारों की जान बच रही है, दहेज प्रथा ख़त्म हो रही है, पर्यावरण की रक्षा हो रही है, साइकिल चलाकर लोगों का पेट कम हो रहा है, तो किसी को क्या तकलीफ है भाई!

वैसे भी मेरा मानना है कि पेट्रोल की कीमतें अगर यूं ही बढ़ती रही, तो महंगाई बढ़ेगी। महंगाई बढ़ी, तो आम आदमी का तेल निकलेगा और एक बार आम आदमी खुद तेल देने लगा, तो महंगाई अपने आप कम हो जाएगी!

मगर बजाए सरकार की इस दूरदर्शिता को समझने के, कुछ लोग हायतौबा मचाकर देश का माहौल खराब कर रहे हैं। समाज में तनाव पैदा कर रहे हैं। मेरी सरकार से गुज़ारिश है कि ऐसे लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाकर उन्हें फौरन गिरफ्तार किया जाए। ये लोग इस लायक ही नहीं हैं कि इनका भला किया जा सके।

जर्मन कवि बर्टोल्ट ब्रेख्त ने अपनी एक कविता में कहा था… सरकार जनता को भंग कर दे और अपने लिए नई जनता चुन ले! मुझे लगता है हमारी सरकार को भी ब्रेख्त की इस सलाह पर विचार करते हुए ऐसी जनता को भंग कर देना चाहिए जो पेट्रोल की बढ़ी कीमतों में अपनी भलाई नहीं देख पा रही।

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