जियो फोन में बैटरी जल्दी कैसे चार्ज करें

जियो फोन में बैटरी जल्दी कैसे चार्ज करें

जिओ मोबाइल फ़ास्ट चार्ज करने के लिये इनपुट 100-240 एसी वाल्ट की आवश्यकता होती है तथा 1a  चार्जर की आवश्यकता होती है आउटपुट 5.0v से 700ma कि आवश्यकता होती है जिओ मोबाइल को फ़ास्ट चार्ज करने के लिए life Company का चार्जर सबसे ऊपरयुक्त माना जाता है

मोबाइल की बैटरी फूलती क्यों है

आपने अपने मोबाइल फोन को देखा होगा तो आपको पता होगा कि कई बार मोबाइल कि बैटरी फूलकर हवा भरे तकिए के समान मोटी लगती है। और जल्दी ही काम करना बंद कर देती है। और कभी-कभी यह फट भी जाती है जिसके चलते देश और दुनिया में कई हादसे हो चुके हैं। सवाल है कि मोबाइल की बैटरी फूलती क्यों है

कनाडियन लाइट सोर्स, सस्केटून के टोबी बॉण्ड के मुताबिक फोन, मोबाइल  लैपटॉप टेबलेट,  में जो बैटरी लगाई जाती है जिसकी संरचना की वजह से ही ऐसा होता है। ये लीथियम-आयन बैटरियां होती हैं, जिनकी विशेषता यह है कि ये हल्की-फुल्की होती हैं और इनमें काफी चार्ज संग्रहित(Storage) किया जा सकता है।

इन बैटरियों में अक्सर इलेक्ट्रोड एक चादर के रूप में होता है जो ब्रेड रोल की तरह लपेटा जाता है जिससे अधिक से अधिक ऊर्जा-जनक परतें बन सकें। इन परतों के बीच द्रव पदार्थ भरा होता है। मगर इतनी परतें पास-पास होने का परिणाम यह होता कि यदि इनमें गैसें बनें तो निकल नहीं सकतीं। गैसें इन परतों के बीच भर जाती है और बैटरी फूल कर मोटी हो जाती है।

बैटरी में गैस बनने के कई कारण होते हैं। कि वह बहुत अधिक गर्म हो रही हो। खास तौर से लगातार उपयोग की वजह से भी ऐसा हो जाता है। यह स्थिति अक्सर गेम(game) वगैरह खेलने पर पैदा होती है। यह स्थिति भी हो सकती है कि बैटरी ओवरचार्ज हो जाए या बहुत दिनों तक डिसचार्ज कि अवस्था में पड़ी रहे। दोनों ही स्थितियों में बैटरी में गैस बनकर बैटरी की परतों के बीच भरने लगती है।

बॉण्ड और उनके सहयोगीयो  ने उच्च शक्ति के एक्स-रे से अवलोकन किया तो पाया कि जब गैस की मात्रा बढ़ने लगती है तो परतें मुड़कर एक दूसरे से दूर जाने लगती हैं। संभवत: ये उन स्थानों कि और मुड़ती हैं जहां निर्माण के समय कोई दोष रह गया हो जरनल ऑफ दी इलेक्ट्रोकेमिकल सोसायटी में प्रकाशित उनके इस निष्कर्ष से पता लगता है कि निर्माण प्रक्रिया में सुधार करने से बैटरी फूलने की समस्या से बचा जा सकता है।

इसके अलावा और  यह भी पता चली है कि गैस बनने की प्रक्रिया इन बैटरियों के तरल घटकों की वजह से पैदा होती है। न्यू लाउथ वेल्स विश्वविद्यालय के नीरज शर्मा(Neeraj Sharma) का कहना है कि उनका समूह  पूर्णत: ठोस बैटरी बनाने के काम में लगा है। किंतु उसको बनाने से पहले कई चुनौतियां हैं। मगर जब तक वह संभव नहीं होता तब तक इतना तो किया ही जा सकता है कि बैटरी को बहुत ज्यादा गर्म नहीं होने दें।

जियो फोन में बैटरी जल्दी कैसे चार्ज करें