मोने Claude Monet

क्लोद मोने Claude Monet (1840-1926)

प्रभाववाद के सिद्धांतों को चरम सीमा तक प्रयोगान्वित करके उनको चित्रकार के लिये उपयुक्त सिद्ध करने का कार्य क्लोद मोने Claude Monet ने किया। वे प्रभाववादियों के नेता थे और अंत तक प्रभाववाद में निष्ठावान् रहे।

क्लोद क्लोद मोने Claude Monet के पिता पन्सारी थे और उन्होंने क्लोद की चित्रकार बनने की मनीषा का विरोध किया। बचपन में ही क्लोद अपनी शालेय अभ्यास-पुस्तिकाओं में रेखाचित्र बनाने में रुचि लेने लगे।

उम्र के 16 वें साल तक वे ल आव में चित्रकार व व्यंग्य-चित्रकार के रूप में प्रसिद्ध हुए और उनको 25 फ्रांक प्रति चित्र के मूल्य से बहुत काम मिलने लगा। उनके चित्र किसी दूकान की प्रदर्शन-खिड़की में लगाये जाते।

उसी दूकान में उनको प्रकृति-चित्रकार ओजेन बुदँ के चित्र देखने को मिले। बुबै पहले उस दूकान के मालिक थे और चित्रकारों को कलासामग्री व चित्रों के चौखटे बेचते थे।

मिले, कुत्युर, त्रायों आदि चित्रकार गर्मी की छुट्टियाँ बिताने को वहाँ आते। उनसे प्रोत्साहन पाकर बु, चित्रण करने लगे और कुछ समय बाद अधिक अध्ययन के लिए पैरिस रवाना हुए।

पहले से ही खुले वातावरण के चित्रण में बुदँ की रुचि थी और पैरिस की चित्रशाला में अध्ययन करने से वह कम नहीं हुई। बुदै ने क्लोद की असाधारण प्रतिभा को पहचाना और उनको प्रत्यक्ष स्थान पर जाकर प्रकृति-सौंदर्य को चित्रित करने का महत्त्व समझाया।

आरंभ में घमंडी क्लोद ने बुदँ के उपदेश को नहीं माना, परन्तु धीरे-धीरे प्रकृति-सौंदर्य ने उनको अपनी ओर ऐसे आकृष्ट किया कि वे अंत तक प्रकृति के पागल पुजारी बने रहे। 1859 में वे जब पैरिस गये तब तक उनकी प्रकृति-चित्रण के प्रति रुचि काफी बढ़ गयी थी।

1861 में जब सैनिक-सेवा में उनको अल्जियर्स भेजा गया तब वहाँ के प्रकाशमान व रंगीले वातावरण का उन पर ऐसा प्रभाव पड़ा जो आजीवन टिका रहा।

1862 मैं मने वापस पेरिस आकर ग्लेयर की चित्र शाला में प्रविष्ट हुए वहां मानव शरीर चित्रण के लिए आदमी को सामने बिठा थे किंतु प्राचीन ग्रीक मूर्तियों को आदर्श मानकर मानव शरीर चित्रण .करने को कहते क्लोद मोने Claude Monet के व्यक्ति चित्र की यथार्थता को देखकर ग्लेयर ने कहा भद्दा है

वास्तविकता के अध्ययन से चित्रण में सहायता मिलती हैं परंतु आदर्शों के पालन से ही चित्र सुंदर व कलापूर्ण बनता है मोनाको इस प्रकार की शिक्षा से घृणा थी किंतु वे गलेयर की चित्र शाला को छोड़ नहीं सकते थे क्योंकि उनके पिता काआदेश था

यदि वे किसी प्रसिद्ध चित्रकार से शिक्षा प्राप्त नहीं करेंगे तो उनको किसी भी प्रकार की सहायता नहीं मिलेगी। वहाँ उनका बाजीय से परिचय हुआ जो वैद्यकी के साथ चित्रकला का भी अध्ययन कर रहे थे। सिसली व रेन्वार् भी ग्लेयर की चित्रशाला के विद्यार्थी थे।

‘ अस्वीकृत चित्रकारों की प्रदर्शनी’ के दूसरे साल ग्लेयर ने अपनी चित्रशाला बंद की और क्लोद मोने Claude Monet पूर्ण स्वतंत्र होकर चित्रण करने लगे। मार्तिने कलावीथिका में आयोजित माने की प्रदर्शनी को देख कर क्लोद मोने Claude Monet बहुत प्रभावित हुए।

यह उनका विशुद्ध रंगांकनपद्धति से प्रथम परिचय था। रूढिबद्ध छाया-प्रकाश के कृत्रिम प्रभाव को हटा कर चित्र को चमकीला रूप कैसे प्रदान किया जा सकता है यह उन्होंने माने के चित्रण से सीखा।

अब उन्होंने चित्रकार साथियों का मंडल बनाया और वे सब फाँतेनब्लो वन के सीमावर्ती शेली नाम के गाँव के आस-पास प्रकृति-चित्रण करने लगे। यहाँ उनका बार्बिजां चित्रकारों से परिचय हुआ एवं उनकी प्रकृति-चित्रण-पद्धति का उनको ज्ञान हुआ।

1866 में क्लोद मोने Claude Monet ने कामिल नाम की लड़की का (जो बाद में उनकी पत्नी हुई) व्यक्तिचित्र बनाया जो उस साल की राष्ट्रीय कला-प्रदर्शनी में स्वीकृत हुआ। दूसरे साल उन्होंने अपना प्रसिद्ध चित्र ‘ बगीचे में महिलाएँ 26 बनाया जो उनके मित्र बाजीय ने 2500 फ्रांक देकर खरीदा।

इस समय क्लोद मोने Claude Monet को कठिन आर्थिक परिस्थिति का सामना करना पड़ रहा था; माने व अन्य उदार मित्रों की सहायता से ही वे उस परिस्थिति को पार कर सके। उनकी विपन्नावस्था की कल्पना उनके उस समय माने को लिखे हुए पत्रों से आती |

1870 में जर्मनी ने फ्रांस पर आक्रमण किया और क्लोद मोने Claude Monet प्रथम हालेंड भाग गये और उसके पश्चात् पिसारो के साथ लंदन में रहे। हालैंड में पन्सारी की दुकान में सामान पर लपेटने के लिए रखे हुए कागजों पर क्लोद मोने Claude Monet को जापानी छापचित्र देखने को मिले।

छापचित्रों के अनोखे संयोजन व अपरिचित रंगांकन से उनको नया दृष्टिकोण प्राप्त हुआ। लंदन में टर्नर के प्रकृतिचित्रों से वे बहुत प्रभावित हुए। भिन्न रंगों व छटाओं द्वारा वातावरण व प्रकाश का प्रभाव किस तरह बनाया जा सकता है इसका प्रमाण उनको देलाक्रा व माने के चित्रों से मिला था

; टर्नर के चित्र इस पद्धति के बहुत ही स्पष्ट व सफल उदाहरण थे। अब तक विशुद्ध रंगांकन के साथ क्लोद मोने Claude Monet वस्तु के निजी रंग पर भी ध्यान देकर चित्रण किया करते थे। अब क्लोद मोने Claude Monet ने निश्चय किया कि सम्पूर्ण दृश्य पर हुए प्रकाश के प्रभाव को प्रमुख लक्ष्य मान कर वे चित्रण करेंगे।

1874 पश्चात् बनाये गये क्लोद मोने Claude Monet के चित्र ऐसे दिखाई देते हैं जैसे कि पार्थिव वस्तुओं को व्याप्त करने वाले भिन्न अवस्था प्राप्त वातावरणों के प्रतिरूप। प्रकाश-किरणों के परावर्तन की जगमगाहट को अंकित करने के उद्देश्य से छाया के क्षेत्रों के चित्रण में भी उन्होंने विशुद्ध रंगों का प्रयोग किया है।

ऐसा लगता है कि सभी वस्तुमात्र सप्तरंगीय वातावरण-रूपी द्रव में डुबा हुआ है जो द्रव ऋतु व समय के परिवर्तन के अनुसार गिरगिट के समान अपना रुख बदलता है। काफे गेर्खा में जो प्रभाववादी चित्रकार कलासम्बन्धी चर्चा करने को मिलते थे

उनके विचारभिन्नता के अनुसार दो वर्ग किये जा सकते हैं; पहले वर्ग में माने, रेन्वार् व देगा जैसे चित्रकार हैं जिनकी कला में प्रभाववादी अंकन-पद्धत्ति की विशेषताओं के अतिरिक्त समकालीन जीवन का भी दर्शन है; दूसरे वर्ग में क्लोद मोने Claude Monet, पिसारो व सिसली ये प्रभाववादी है

जिनकी कला में प्रभाववाद के सिद्धांतों का कट्टरता से पालन है किंतु वातावरण व प्रकाश के चंचल रूपों के अतिरिक्त अन्य उपलब्धियां नहीं हैं। क्लोद मोने Claude Monet ने अविश्रांत परिश्रम करके प्रभाववाद को 19 वीं शताब्दी की सबसे महत्त्वपूर्ण व क्रांतिकारी कलाशैली का स्थान प्राप्त कराया।

उनके चित्रों में विशुद्ध रंग-संगति एवं नैसर्गिक प्रकाश एक साथ दर्शकों को मोहित कर लेते हैं। उन्होंने रंगों के स्वाभाविक सौंदर्य की रक्षा करके उसके द्वारा नैसर्गिक प्रकाश व अवकाश के परिणाम को चित्रित किया और रूढिबद्ध छायाप्रकाश के परिणाम को चित्रकला से हटा दिया।

कुर्वे ने चित्रकला से काल्पनिक व पौराणिक विषयों को हटाया एवं सूर्यदेवता के चित्र को देखकर पूछा था “ क्या आपने सूर्यदेवता को देखा है?” अब क्लोद मोने Claude Monet व उनके प्रभाववादी अनुयायियों ने सूर्य के प्रकाश को सब जगह देखा और उसके चंचल प्रभाव को अपने चित्रों का विषय बनाया।

ये सब चित्रकार चित्रण के लिये बगीचा, रेल्वे स्टेशन, नदी का किनारा, उपहारगृह, घुड़दौड़ के मैदान, नाटकगृह आदि स्थानों पर जाते। वे जीवन से प्यार करते; जहाँ भी देखते सौंदर्य को अनुभव करते और उनको चित्रणयोग्य विषय मिलता।

क्लोद मोने Claude Monet ने पैरिस, लंदन व वेनिस के शहरी दृश्यों को चित्रित किया है किंतु मैदानों, नदीकिनारों व उपवनों के दृश्य उनको विशेष प्रिय थे। कार्यकक्ष में बैठकर चित्रण करना उनको बिल्कुल पसन्द नहीं था और वे कहते “ मेरे पास कोई कार्यकक्ष नहीं है एवं मेरी समझ में नहीं आता

कमरे में बन्द होकर चित्रकार क्यों काम करना चाहता है।” पुर्विल की पहाड़ी के उतार-चढ़ाव, जिवर्नी का बगीचा, सेन नदी का शिकारा, आंतिब के ताड़वृक्षों की छाया ये सब स्थान क्लोद मोने Claude Monet के कार्यकक्ष थे। प्राकृतिक सौन्दर्य के वे दीवाने थे

अपनी सौन्दर्यानुभूति को चित्ररूप देना कितना असम्भव है इस सम्बन्ध में उन्होंने अपने मित्र ग्युस्ताव जेफ्राय को लिखा था “ मैंने फिर ऐसे कार्य को आरम्भ किया है जिसकी सिद्धि असम्भव है. पानी के पृष्ठभाग पर डोलती हुई घास की पत्तियाँ. दीखने में अतिसुन्दर किंतु चित्रित करते-करते आदमी पागल हो जाता है।

” उनके एक अन्य अनुभव से भी रंग व प्रकाश के सौन्दर्य के वे कैसे गुलाम हो गये थे इसका प्रमाण मिलता है; 1879 में जब उनकी प्रिय पत्नी कामिल मृत्युशय्या पर आसीन थी और वे समीप बैठकर पत्नी के मुखमण्डल पर बदलते हुए रंगों को गौर से देख रहे थे

तब उन्होंने अकस्मात् भयभीत होकर महसूस किया कि वे रंगसौन्दर्य के सामने अपनी पत्नी की गिरती हुई अन्तकालीन अवस्था को भी भूल गये थे। क्लोद मोने Claude Monet ध्येयवादी एवं परिश्रमी चित्रकार थे।

प्रारम्भ में अत्यन्त विपन्नावस्था में उन्होंने बड़ी मेहनत से कलानिर्मिति की और बाद में कीर्ति व सम्पन्नावस्था प्राप्त होने पर भी वे ध्येयनिष्ठ व मेहनती जीवन से विचलित नहीं हुए। वे एक ही स्थान को लेकर ऋतु व समय के परिवर्तन के अनुसार उसके कई चित्र बनाते; वही स्थान प्रकाश व वातावरण में परिवर्तन होते ही उनके लिए भिन्न विषय बन जाता।

उनकी ऐसी चित्रमालिकाओं में से जिवर्नी के चिनारवृक्ष, सूखी घास के ढेर व रुआँ के गिरजाघर 27 की चित्रमालिकाएं विशेष प्रसिद्ध हैं। 1890 में उन्होंने ‘ घास का ढेर’ चित्रमालिका को आरम्भ किया;

वे सवेरे उठते ही बहुत से पट लेकर घास के ढेर के सामने जा बैठते और करीब एक घण्टे तक एक पट पर काम करने के बाद दूसरे पट पर काम शुरू करते इसी तरह शाम तक आठ से दस तक पटों पर चित्र बनाते; दूसरे दिन फिर वहीं जाकर उन्हीं पटों पर आगे काम करते और इस प्रकार चित्रमालिका को पूर्ण करते।

समय के अनुसार बदलने वाले दृश्य प्रभाव को चित्रित करने का ऐसा अनोखा प्रयोग अब तक किसी चित्रकार ने नहीं किया था। रुओं के गिरजाघर के दर्शनीय भाग के ठोस शिलाकार्य पर चंचल सूर्यकिरणों का नेत्रोद्दीपक नृत्य भोने ने देखा और उसको भी उन्होंने चित्रमालिका में बन्दी किया।

इस चित्रमालिका में स्थायित्व व चांचल्य जैसे विरोधी तत्त्वों को परिणामकारक ढंग से एक साथ चित्रित करके चित्रकार ने अपने कला-प्रभुत्व को सिद्ध किया है। आर्जातोई के दृश्यों को चित्रित करने के लिये क्लोद मोने Claude Monet ने

शिकारा खरीदा और उस पर बैठकर उन्होंने नदी किनारों के कई चित्र बनाये। मनोहर प्राकृतिक दृश्य से प्राप्त ऐन्द्रिय आनन्द में तन्मय होने के क्लोद मोने Claude Monet के मनोबल व दृश्य अनुभूति का परिशीलन करके उसको पट पर अंकित करने की उनकी कुशलता को देखकर सेजान ने कहा था “

क्लोद मोने Claude Monet केवल आँख है किंतु कैसी आँख!”। चित्रण करते समय क्लोद मोने Claude Monet दृश्य में कितने तद्रूप होते थे इसका प्रमाण उनके जेफ्राय को लिखे हुए पत्र से मिलता है; उन्होंने लिखा था “ मुझे जो दिखाई देता है वह मैं चित्रित करता हूँ;

यदि चित्रण के सचमुच कोई मूलभूत सिद्धांत हैं तो उनको मैं उस समय भूल जाता हूँ; संक्षेप में, मेरी व्यक्तिगत सौंदर्यानुभूति को साकार करने के प्रयास में मैं अपने दोषों को भी चित्रण में रहने देता हूँ”।

1901 के करीब क्लोद मोने Claude Monet ने लंदन में टेम्स नदी के 37 चित्र बनाये जिनमें कुहरे से व्याप्त वातावरण के अन्तर्गत नदी किनारे पर स्थित मानवनिर्मित जड़ वस्तुओं व नैसर्गिक चंचल सूर्यप्रकाश के बीच के संघर्ष को चित्रित किया है।

‘ कुमुदिनी के फूलों 28 की चित्रमालिका को छोड़ क्लोद मोने Claude Monet की कोई सी भी सम्पूर्ण चित्रमालिका एक जगह देखने को नहीं मिलती यह दुर्भाग्य की बात है।

क्लोद मोने Claude Monet के 8 चित्रों की अन्तिम चित्रमालिका’ कुमुदिनी के फूल ‘ पैरिस के त्विलेरी बगीचे में एक छोटे तालाब के चारों ओर लगायी गयी है। इस चित्रमालिका में कहीं भी जमीन या आसमान को चित्रित नहीं किया गया है।

पूरे चित्रक्षेत्र में पानी ही पानी है और उसके पृष्ठभाग पर प्रकाशकिरणों से चमकते हुए रंगबिरंगे फूलों व पत्तों को चित्रित किया है; फूलों व पत्तों का चित्रण निमित्तमात्र है और चित्र का प्रभाव वस्तुनिरपेक्ष सा रंगसंगति में मोहक है। इस चित्रमालिका से वस्तुनिरपेक्ष कलाकारों को काफी प्रेरणा मिली।

आरम्भ में क्लोद मोने Claude Monet ने जिस ध्येय को अपनाया था उसकी सफलता के लिए वे श्रद्धा व निश्चय के साथ अविरत, आजीवन कार्य करते रहे। जब उनको फ्रेंच सरकार ने राष्ट्रीय सम्मान 29 से पुरस्कृत किया तब रेन्वार ने उनको अभिनन्दन-पत्र लिखकर उनकी निश्चयवृत्ति की प्रशंसा की; रेन्वार् ने लिखा था“

आप अपने मार्ग को सुनिश्चित व सराहनीय रूप में देख रहे हैं. इसके विपरीत यह तो कभी मेरी समझ में नहीं आया कि मुझे अगले क्षण क्या करना है ”। स्वभाव से भावनाशील होने के कारण बहुत ही कम कलाकारों में क्लोद मोने Claude Monet की निश्चयवृत्ति एवं ध्येयनिष्ठता देखने को मिलती है।

क्लोद मोने Claude Monet के चित्रों से प्रभाववाद का अध्ययन सबसे सरल व लाभदायक है क्योंकि उन्होंने प्रभाववादी सिद्धांतों का जितनी एकनिष्ठा से पालन किया उतना और किसी चित्रकार ने नहीं किया। ‘ आजोतोई की लाल नावें’, चिनारवृक्ष  या उनके किसी अन्य चित्र का यदि

हम निकट से अध्ययन करेंगे तो प्रकाश के क्षेत्र में हलके पीले, गुलाबी वगैरह रंगों के धब्बे व छाया के क्षेत्र में नीले, हरे, जामुनी वगैरह गहरे रंगों के धब्बे स्पष्ट रूप से दिखायी देंगे; प्रत्येक रंग के कई प्रकारों को चुनकर उन्होंने प्रयोगान्वित किया है।

दूर से देखने पर ये भिन्न रंगों के धब्बे एक दूसरे में विलीन हो जाते हैं और जगमगाहट सी नजर आती है जो प्रभाव रंगों के प्रत्यक्ष मिश्रण से किसी हालत में नहीं बनता। समीपवर्ती भिन्न रंगों के धब्बों को नेत्र द्वारा मिश्रित रूप में देखने की क्रिया को ‘ दृष्टिजन्य मिश्रण 31 कहते हैं

व यह मिश्रित प्रभाव रंगों के प्रत्यक्ष मिश्रण से अधिक चमकीला, मोहक व यथार्थ होता है; चित्र के जगमगाते हुए क्षेत्र में दृश्यांतर्गत वस्तुएँ अस्पष्ट सी दिखायी देती हैं और सम्पूर्ण प्रभाव में प्रत्येक वस्तु को गौण स्थान प्राप्त होता है।

अपने अन्तिम चित्रों में वस्तुओं को आभास के रूप में अस्पष्ट चित्रित करके क्लोद मोने Claude Monet वस्तुनिरपेक्ष कला के काफी निकट पहुँचे। क्लोद मोने Claude Monet को नैसर्गिकतावाद एवं वस्तुनिरपेक्ष कला के बीच की कड़ी मानते हैं।

क्लोद मोने (Claude Monet) के प्रसिद चित्र

Impression Sunrise,San Giorgio Maggiore at Dusk,Water Lilies,The Artist’s Garden at Giverny,The Poppy Field near Argenteuil,Haystacks,The Waterlily Pond,The Magpie,The Garden of Monet at Argenteuil,Poppy Field,Women in the Garden,Tulip Fields,Sunflowers,Cliff Walk at Pourville,The Garden at Sainte-Adresse,Garden Path at Giverny,Waterloo Bridg,Water Lilies: Morning,Rouen Cathedral,Haystacks,Woman with a Parasol,Red Boats at Argenteuil,San Giorgio Maggiore at Dusk

पाब्लो पिकासो

 

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